दिल्ली में गूंजा बिहार का संस्कृत गौरव! मृत्युंजय झा और डॉ.राजनाथ झा को मिला संस्कृत भूषण सम्मान

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क :पटना/नई दिल्ली। देवभाषा संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से बुधवार को नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित प्रतिष्ठित होटल आईटीसी मौर्य में द्वितीय ‘संस्कृत भूषण सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। रामायण रिसर्च काउंसिल के प्रकल्प ‘रामायण वार्ता’ के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में बिहार को विशेष प्रतिनिधित्व मिला। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा तथा ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा सहित देश की 14 विशिष्ट विभूतियों को ‘संस्कृत भूषण सम्मान’ से अलंकृत किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय नेता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी थे। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, ब्रह्मर्षि डॉ. कृष्ण चामुंडदेशवर्रा महर्षि , सुप्रसिद्ध श्रीरामकथावाचक आचार्य सुदर्शन जी महाराज तथा श्रीजानकी कथा के बाल-व्यास वैदेहीनंदन वेदांत जी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। संतों, विद्वानों, न्यायविदों, शिक्षाविदों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने समारोह को विशिष्ट गरिमा प्रदान की।

इस अवसर पर रामायण रिसर्च काउंसिल के मुख्य संयोजक एवं भाजपा के निवर्तमान राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, ‘रामायण वार्ता’ के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के सरगुजा सांसद चिन्तामणि महाराज, भिण्ड-दतिया की सांसद संध्या राय, रीवा की विधायक रीति पाठक तथा राजस्थान की पूर्व सांसद रंजीता कोली उपस्थित रहीं।

न्यायपालिका, शिक्षा और संस्कृत जगत की 14 विभूतियां सम्मानित

समारोह में महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल के कुलपति प्रो. डॉ. राजेन्द्रकुमार अनायत, संस्कृत भारती के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. रमेश कुमार पाण्डेय, राजस्थान एवं जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. एन. झा, सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यम, सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुकुन्दकम शर्मा, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व संस्कृत प्रोफेसर एवं WAVES-India की अध्यक्ष तथा महासचिव प्रो. (डॉ.) शशि तिवारी और प्रख्यात भारतविद् प्रो. डॉ. शशि बाला को सम्मानित किया गया।

इसके अतिरिक्त ‘विश्वस्य वृत्तांतम्’ के एडिटर-इन-चीफ आचार्य शिवराज झा, संस्कृत शोधार्थी गायत्री राजपूत, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव डॉ. मधुकर मारुति वावरे, ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा तथा सांस्कृतिक कंटेंट क्रिएटर भानुज को भी ‘संस्कृत भूषण सम्मान’ प्रदान किया गया।

संस्कृत शिक्षा के विकास में मृत्युंजय झा के योगदान को सम्मान

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा को संस्कृत भाषा एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संस्कृत शिक्षा के संरक्षण एवं संवर्धन, शैक्षणिक गतिविधियों को प्रोत्साहन तथा संस्कृत शिक्षण संस्थानों की शैक्षणिक परंपरा को आगे बढ़ाने के प्रति उनकी भूमिका को इस अवसर पर विशेष पहचान मिली। उनका सम्मान बिहार में संस्कृत शिक्षा के महत्व और इस क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं एवं व्यक्तियों के योगदान को राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वैदिक शिक्षा, ज्योतिष एवं वास्तु के क्षेत्र में डॉ. राजनाथ झा का योगदान

बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान के निदेशक हैं। उनके मार्गदर्शन में संस्थान द्वारा संचालित सनातन वैदिक गुरुकुल में विद्यार्थियों को निःशुल्क वैदिक शिक्षा प्रदान की जाती है। ज्योतिष एवं वास्तु के क्षेत्र में उनके कार्यों के साथ संस्कृत, वैदिक ज्ञान और सनातन परंपरा के संरक्षण तथा नई पीढ़ी तक इसके प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। उनका यह सम्मान बिहार की वैदिक एवं संस्कृत परंपरा के लिए भी गौरव का विषय है।

संस्कृत को नई पीढ़ी से जोड़ने का आह्वान

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, साहित्य, संस्कृति, सभ्यता और आध्यात्मिक चेतना की आधारशिला है। इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए शिक्षण संस्थानों के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को आधुनिक संदर्भों में नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महती आवश्यकता है।

कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन पिताम्बर मिश्र ने किया। रामायण रिसर्च काउंसिल के सचिव सुशांत कुमार एवं पिताम्बर मिश्र सहित आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समारोह का द्वितीय संस्करण संतों की आध्यात्मिक चेतना, विद्वानों की बौद्धिक परंपरा, न्यायविदों की गरिमा और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता के माध्यम से संस्कृत के राष्ट्रीय गौरव को प्रतिष्ठित करने का महत्वपूर्ण अवसर बना।

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