बिहार के ग्रामीण इलाकों में हर घर नल का जल योजना से जुड़ी शिकायतों के समाधान को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग यानी पीएचईडी के अनुसार, 15 अगस्त 2025 से 2 नवंबर 2026 तक प्राप्त कुल शिकायतों में 98.95 प्रतिशत का निष्पादन कर दिया गया है। विभाग का दावा है कि ग्रामीण परिवारों को नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शिकायतों के समाधान की व्यवस्था लगातार प्रभावी तरीके से काम कर रही है।
दरअसल, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार में हर घर नल का जल योजना को सुचारू रूप से संचालित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान करने के लिए 24 घंटे शिकायत सुनने और उनके निष्पादन की प्रणाली विकसित की गई है। इसका फायदा अब ग्रामीण परिवारों को मिल रहा है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, 15 अगस्त 2025 से 31 मार्च 2026 तक प्राप्त शिकायतों में 99.99 प्रतिशत का समाधान किया गया। वहीं, 1 अप्रैल 2026 से 2 नवंबर 2026 के बीच मिली शिकायतों में 98.4 प्रतिशत का निष्पादन हुआ है। शेष शिकायतों के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई जारी है।
मंत्री ने अधिकारियों को दिया सख्त निर्देश
इस मामले में विभागीय मंत्री संजय कुमार सिंह ने अधिकारियों और अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि लंबित शिकायतों का जल्द से जल्द निष्पादन किया जाए। उन्होंने कहा है कि शिकायतों के समाधान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी पदाधिकारी या अभियंता की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि पीएचईडी का मुख्य उद्देश्य बिहार के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना और निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करना है।
अब घर बैठे दर्ज करा सकते हैं शिकायत
विभाग ने आम लोगों की सुविधा के लिए कई माध्यम उपलब्ध कराए हैं। नल-जल योजना से संबंधित शिकायत टोल फ्री नंबर 18001231121, 155367 और 18003451121 पर दर्ज कराई जा सकती है। इन नंबरों पर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक शिकायत की सुविधा उपलब्ध है।
इसके अलावा व्हाट्सएप नंबर 8544429024 पर भी शिकायत भेजी जा सकती है। शिकायतकर्ता को अपना नाम, मोबाइल नंबर, गांव, वार्ड संख्या, पंचायत, प्रखंड और जिला सहित समस्या की जानकारी देनी होगी।
विभाग ने ईमेल, नल-जल शिकायत ऐप और वेबसाइट के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था की है।
अब देखना होगा कि विभाग लंबित शिकायतों का कितनी तेजी से समाधान करता है और ग्रामीण इलाकों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में कितनी सफलता मिलती है।