NEWS PR डेस्क: पटना,17 जुलाई। बिहार सरकार राज्य में कला और संस्कृति के क्षेत्र को नई दिशा देने की तैयारी में है। इसी कड़ी में राज्य में एक कला विश्वविद्यालय स्थापित करने और भोजपुरी लोक परंपरा के महान शिल्पी भिखारी ठाकुर के नाम पर संग्रहालय बनाने की योजना तैयार की गई है। दोनों परियोजनाओं को केंद्र सरकार के सहयोग से साकार करने की पहल की जाएगी।
कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अनुसार, प्रस्ताव को विभागीय स्तर पर तैयार कर लिया गया है। योजना के तहत कला विश्वविद्यालय को पटना के आसपास विकसित करने की संभावना है, जबकि भिखारी ठाकुर संग्रहालय सारण जिले के आसपास स्थापित किया जा सकता है। इस संबंध में अगले एक महीने के भीतर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के साथ उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है।
वर्तमान में बिहार में रंगमंच, संगीत, नृत्य और वादन जैसी विधाओं में उच्च शिक्षा और डिग्री प्रदान करने वाला राष्ट्रीय स्तर का कोई संस्थान नहीं है। इसके कारण राज्य के विद्यार्थियों और कलाकारों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। प्रस्तावित विश्वविद्यालय शुरू होने से राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण कला शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।

देश के महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली सहित कई राज्यों में कला विश्वविद्यालय पहले से संचालित हैं। बिहार में भी लंबे समय से नाट्य, संगीत और अन्य ललित कलाओं के लिए एक समर्पित विश्वविद्यालय की मांग उठती रही है। नई पहल से इस मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि विभाग ने कला विश्वविद्यालय और भिखारी ठाकुर संग्रहालय की स्थापना को लेकर सैद्धांतिक सहमति बना ली है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से वित्तीय और तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया जाएगा। विश्वविद्यालय में विभिन्न कला विधाओं के पाठ्यक्रम संचालित होंगे, जबकि संग्रहालय में भिखारी ठाकुर की विरासत के साथ-साथ बिहार की लोक कलाओं और सांस्कृतिक धरोहर को भी एक ही परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा।
