पटना को मूक-बधिर मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी पहल, 78 बच्चों को मिला नया जीवन

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 29 मई: पटना जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ‘श्रवण श्रुति कार्यक्रम’ के तहत मूक-बधिर बच्चों को सुनने और बोलने की क्षमता लौटाने की दिशा में लगातार उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को 25 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए कानपुर स्थित स्व. एस.एन. मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन भेजा गया।

पटना समाहरणालय में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने इन बच्चों और उनके अभिभावकों से एक-एक कर मुलाकात की। इस दौरान अभिभावकों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने जिला प्रशासन की इस मानवीय पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनके बच्चों के जीवन को नई दिशा मिली है।

जिलाधिकारी ने कहा कि पटना जिला को “मूक-बधिर मुक्त” बनाना प्रशासन का लक्ष्य है। इसके लिए स्वास्थ्य, आईसीडीएस, जीविका, पंचायती राज, समाज कल्याण, शिक्षा और ग्रामीण विकास विभाग सहित सभी संबंधित संस्थाओं को मिलकर कार्य करना होगा।

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उन्होंने बताया कि पटना जिले में अब तक 4 लाख 25 हजार 911 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें 1,747 बच्चों में सुनने की समस्या चिन्हित की गई थी। इनमें से 1,658 बच्चों का कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट और छोटी सर्जरी के माध्यम से उपचार किया गया। वहीं कोक्लियर इम्प्लांट के लिए 89 बच्चों को चिन्हित किया गया, जिनमें से 53 बच्चों को पहले ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है।

जिलाधिकारी ने बताया कि आज 25 और बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट के लिए भेजा जा रहा है। इस प्रकार एक वर्ष से भी कम समय में कुल 78 बच्चों को श्रवण श्रुति कार्यक्रम के तहत उपचार की सुविधा दी गई है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बेहद संतोषजनक है।

कार्यक्रम के दौरान पहले से उपचार प्राप्त कर चुके कई बच्चों ने जिलाधिकारी के सामने ए, बी, सी, डी और 1, 2, 3 बोलकर सुनाया। बच्चों में आए इस सकारात्मक बदलाव को देखकर जिलाधिकारी और उपस्थित अभिभावक भावुक नजर आए।

जिलाधिकारी ने कहा कि जन्मजात एवं कम उम्र में होने वाली श्रवण बाधिता की जल्द पहचान बेहद जरूरी है। यदि समय रहते स्क्रीनिंग, इलाज और स्पीच थेरैपी हो जाए तो बच्चा सामान्य बच्चों की तरह बोल और सुन सकता है। उन्होंने जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने बताया कि उपचार के बाद बच्चों की नियमित स्पीच थेरैपी भी कराई जा रही है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ सकें। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन बच्चों के पुनर्वास और हरसंभव सहायता के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।

कार्यक्रम में श्रवण श्रुति कार्यक्रम में बेहतर कार्य करने वाले पांच अधिकारियों, चिकित्सकों और कर्मियों को सम्मानित भी किया गया। इनमें मसौढ़ी और पालीगंज के सीडीपीओ, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सक, नोडल अधिकारी और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल रहे।

जिलाधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार देश में प्रति एक हजार बच्चों में पांच से आठ बच्चे बधिर जन्म लेते हैं। ऐसे में समय पर पहचान और समुचित उपचार बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्रवण श्रुति कार्यक्रम केवल इलाज नहीं, बल्कि बच्चों को नई आवाज और नया जीवन देने की पहल है।

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