प्रेमचंद रंगशाला में ‘अधूरा सपना’ का प्रभावशाली मंचन, वीर कुँवर सिंह की शौर्यगाथा ने दर्शकों को किया भावविभोर

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: राजधानी पटना के राजेंद्र नगर स्थित प्रेमचंद रंगशाला में शुक्रवार की संध्या कला और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सौजन्य से तथा बिहार संगीत नाटक अकादमी, पटना के सहयोग से पद्मश्री डॉ. जगदीश प्रसाद सिंह द्वारा लिखित नाटक “अधूरा सपना” का भव्य और प्रभावशाली मंचन किया गया। वरिष्ठ रंगकर्मी अभय सिन्हा के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुँवर सिंह की शौर्यगाथा को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं बिहार सरकार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि तथा कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद थे। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी, संग्रहालय निदेशक कृष्ण कुमार और बिहार संगीत नाटक अकादमी के सचिव महमूद आलम सहित कई गणमान्य अतिथि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

वीर कुँवर सिंह के साहस और बलिदान की कथा

नाटक “अधूरा सपना” में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी बाबू वीर कुँवर सिंह के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को बेहद प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। नाटक की शुरुआत उनके दरबार के दृश्य से होती है, जहाँ वे अपने साथियों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते दिखाई देते हैं। आगे बढ़ते हुए नाटक में अंग्रेजों के खिलाफ उनके संघर्ष, साहस और नेतृत्व को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

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नाटक का सबसे मार्मिक दृश्य वह रहा, जब युद्ध के दौरान घायल होने पर वीर कुँवर सिंह अपनी घायल भुजा को काटकर माँ गंगा को अर्पित कर देते हैं। यह दृश्य दर्शकों को भावुक कर गया और पूरे सभागार में तालियों की गूंज सुनाई दी। नाटक के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि भले ही उनका देश को आजाद देखने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन उनका बलिदान इतिहास में अमर हो गया।

सभापति ने किया वीरता का स्मरण

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने वीर कुँवर सिंह की वीरता को याद करते हुए कहा—

“80 बरस की उमर में जागा जोश पुराना था,
सब कहते हैं बाबू कुँवर सिंह बड़ा वीर मर्दाना था।”

उन्होंने कहा कि ये पंक्तियाँ वीर कुँवर सिंह के अदम्य साहस और देशभक्ति का सजीव चित्रण करती हैं। उन्होंने उनके जीवन से जुड़ी कई प्रेरणादायक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाएँ आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

राष्ट्रीय एकता का प्रतीक रहा स्वतंत्रता संग्राम

विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह नाटक उन वीरों की शौर्यगाथा को सामने लाता है जिन्होंने देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे सहित कई वीरों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन बाबू वीर कुँवर सिंह ऐसे योद्धा थे जिन्होंने अंतिम समय तक अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न जाति और धर्म के लोगों ने मिलकर देश की आजादी के लिए योगदान दिया, जो हमारी राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने कला एवं संस्कृति विभाग की टीम को ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बधाई दी।

सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास

कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने कहा कि प्रेमचंद रंगशाला में आयोजित यह नाट्य प्रस्तुति बाबू वीर कुँवर सिंह की देशभक्ति और बलिदान की भावना को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समाज के सामने लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।

कलाकारों के अभिनय की हुई सराहना

नाटक के मंचन के दौरान कलाकारों के सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद और ऐतिहासिक दृश्यों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि द्वारा कलाकारों को सम्मानित किया गया और धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

कार्यक्रम का संचालन श्रीमती सोमा चक्रवर्ती ने किया। इस अवसर पर पटना आंतरिक वित्तीय सलाहकार राणा सुजीत कुमार टुनटुन, कृति आलोक, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सहित विभाग के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।

प्रेमचंद रंगशाला में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों के शानदार अभिनय की जमकर सराहना की और उन्हें खड़े होकर तालियों की गूंज के साथ सम्मानित किया।

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