बिहार का पांच वर्षों में 23,968 मेगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य

Jyoti Sinha
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  • 6 हजार 100 मेगावाट बिजली भंडारण का भी लक्ष्य निर्धारित किया है विभाग ने

पटना, 2 अगस्त-
बिहार सरकार ने आगामी पांच वर्ष यानी 2029-30 तक राज्य में 23 हजार 968 मेगावाट अक्षय ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। साथ ही 6 हजार 100 मेगावाट घंटा ऊर्जा के भंडारण का भी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य राज्य को स्वच्छ ऊर्जा का हब बनाना है। वर्ष 2070 तक देश के शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य में अहम योगदान देना भी है। इसके लिए पिछले सप्ताह पटना में बिहार नई और अक्षय ऊर्जा स्रोत प्रोत्साहन नीति 2025 और बिहार पंप्ड स्टोरेज परियोजना प्रोत्साहन नीति 2025 के लिए एक विशेष समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया।

सौर, वायु और बॉयोमास से बनेगी बिजली
राज्य में सौर, वायु और बॉयोमास से अक्षय ऊर्जा बनाने की योजना है। इस योजना के तहत सबसे ज्यादा 18 हजार 448 मेगावाट बिजली जमीन पर स्थापित सौर परियोजनाओं से उत्पादित की जाएगी। इसके अलावा 900 मेगावाट बिजली सौर पार्कों (20 मेगावाट से बड़े), 495 मेगावाट फ्लोटिंग सौर संयंत्रों और 400 मेगावाट तालाबों पर ऊंचे सौर संयंत्रों को स्थापित कर बिजली पैदा होगी। साथ ही खेती के साथ एग्री वोल्टिक, वायु ऊर्जा, कचरे से बिजली और बायोमास परियोजनाएं भी शामिल हैं।
इसके अलावा 1 हजार 975 मेगावाट ऑन ग्रिड अक्षय ऊर्जा, 340 मेगावाट ऑफ ग्रिड ऊर्जा, 500 मेगावाट छतों पर सौर पैनल और 250 मेगावाट छोटे जलविद्युत संयंत्रों से बिजली मिलेगी। ऊर्जा भंडारण के लिए 6 हजार 100 मेगावाट घंटा की क्षमता में 1 हजार 600 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज और 4 हजार 500 मेगावाट बैट्री भंडारण शामिल हैं।

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चार बड़ी कंपनियों के साथ 5,337 करोड़ का निवेश
इस दूरगामी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने चार बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू किया है। इनमें एलएंडटी, एनटीपीसी, अवाडा ग्रुप और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसइसीआई) शामिल हैं, जिनके साथ 2 हजार 357 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 5 हजार 337 करोड़ रुपये का समझौता हुआ है। बिहार अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (ब्रेडा) को जलविद्युत और पंप्ड स्टोरेज को छोड़कर इस नीति को लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

निवेशकों के लिए दी जा रही छूट
ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार ने हाल के वर्षों में अच्छी प्रगति की है। यह नीति हमें अक्षय ऊर्जा में अग्रणी बनाएगी और निवेश व रोजगार के नए अवसर खोलेगी। वहीं, विभाग के सचिव मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना में निवेशकों को लुभाने के लिए ढेरों प्रोत्साहन दिए गए हैं। इनमें औद्योगिक जमीन पर 100 प्रतिशत स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क में छूट, जमीन के उपयोग में बदलाव शुल्क माफ, ट्रांसमिशन और व्हीलिंग शुल्क में राहत, बिजली शुल्क से छूट, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, ऊर्जा बैंकिंग, फीड इन टैरिफ, ग्रीन टैरिफ, रूफटॉप सौर के लिए छूट और कार्बन क्रेडिट जैसे लाभ शामिल हैं।

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