आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में बिहार बना देश का नंबर वन, सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सफल रहा कार्यान्वयन

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के प्रभावी क्रियान्वयन में बिहार ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मिशन को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए बिहार को देश में पहला स्थान दिया गया है। इसकी घोषणा शुक्रवार (23 जनवरी, 2026) को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय समीक्षा बैठक के दौरान की गई।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, बिहार में नवंबर 2023 में मुख्यमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य योजना के तहत “सभी के लिए बिहार स्वास्थ्य अनुप्रयोग दूरदर्शी योजना (भव्या)” की शुरुआत की गई थी। यह एक आधुनिक स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) है, जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के मार्गदर्शन में तैयार किया गया। इस योजना की परिकल्पना वर्तमान मुख्य सचिव एवं तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) प्रत्यय अमृत द्वारा की गई थी।

विभाग के अनुसार, भव्या प्रणाली को राज्य के सभी 594 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। इस दौरान जिला से प्रखंड स्तर तक रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की गई, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में एक संगठित, पारदर्शी और कागज रहित व्यवस्था स्थापित हो सकी।

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स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इन निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि बिहार अब उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जहां आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अनुरूप भव्या का पूर्ण कार्यान्वयन हो चुका है। ‘स्कैन एंड शेयर’ सुविधा के अंतर्गत अब तक 5.21 करोड़ टोकन सृजित किए जा चुके हैं, जिसके साथ बिहार इस श्रेणी में देश में शीर्ष स्थान पर है।

राज्य में अब तक 6.80 करोड़ आभा (ABHA) पहचान पत्र बनाए जा चुके हैं। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) के निर्माण के मामले में बिहार ने देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। भव्या परियोजना को इसके नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ‘ग्लोबल डिजिटल हेल्थ समिट 2024’ में इनोवेशन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।

इसके अलावा, डिजिटल हेल्थ प्रोत्साहन योजना (DHIS) के तहत राज्य के 7,835 सरकारी अस्पतालों का पंजीकरण किया गया है। इस योजना के अंतर्गत 37.60 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का दावा किया गया, जो देश में सर्वाधिक है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी होंगी।

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