NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली/पटना, 04 जुलाई। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने विधायक को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-दो) और शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने शनिवार को सजा का ऐलान किया।
न्यू ईयर पार्टी में चली गोली, महिला डॉक्टर की हुई थी मौत
यह मामला 31 दिसंबर 2018 का है। दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में आयोजित न्यू ईयर पार्टी के दौरान राजू कुमार सिंह कथित तौर पर हर्ष फायरिंग कर रहे थे। इसी दौरान चली गोली से महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने विधायक, उनकी पत्नी और चार अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने पिछले महीने राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया था, जबकि उनकी पत्नी समेत तीन अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।

अदालत में क्या दी गई दलील?
सजा तय होने से पहले विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने अदालत से उन्हें परिवीक्षा (प्रोबेशन) पर रिहा करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल छह बार विधायक चुने जा चुके हैं, उनका आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उन्होंने कभी जानबूझकर किसी की जान लेने का इरादा नहीं रखा।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि राजू कुमार सिंह समाज के जिम्मेदार और शिक्षित व्यक्ति हैं तथा लंबे समय से अपने क्षेत्र की सेवा कर रहे हैं। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और चार वर्ष की सजा सुनाई।
विधायकी पर संकट
राजू कुमार सिंह को दो वर्ष से अधिक की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता पर संकट खड़ा हो गया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है। ऐसे में राजू कुमार सिंह की विधायकी भी समाप्त होना तय माना जा रहा है, जब तक कि उन्हें उच्च अदालत से दोषसिद्धि पर रोक (Stay on Conviction) जैसी कानूनी राहत नहीं मिलती।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, केवल जमानत मिलने से सदस्यता स्वतः बहाल नहीं होती। इसके लिए उच्च न्यायालय से दोषसिद्धि पर रोक या फैसला पलटना आवश्यक होता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत चुनाव लड़ने पर भी रोक लागू रहेगी।
पहले भी जा चुकी है कई नेताओं की सदस्यता
बिहार की राजनीति में इससे पहले भी सजा के कारण कई जनप्रतिनिधियों की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है। इनमें मिश्रीलाल यादव, अनंत सिंह, अनिल कुमार सहनी, इलियास हुसैन और राजबल्लभ यादव जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं। अब इस सूची में भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह का नाम भी जुड़ गया है।
