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NEWSPR DESK- एक तरफ केंद्र की सरकार बिहार में करोड़ों रुपए की लागत से स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृद्ध करने को लेकर लगातार बड़े-बड़े अस्पतालों का उद्घाटन कर रही है ताकि मरीजों को हर तरह की स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।वही दूसरी ओर बिहार शरीफ सदर अस्पताल का एक बार फिर से पोल पट्टी खुल गई है। दरअसल शनिवार को नालंदा जिले के सिलाव थाना क्षेत्र इलाके में धर्मेंद्र कुमार और बिहार थाना क्षेत्र के अंबेर मोहल्ले में राइस मिल में बिजली के काम करने के दौरान करंट से संजू साव की मौत हो गई थी। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल लाया गया था।
जहां अस्पताल में मौजूद शव वाहन से धर्मेंद्र कुमार के शव को सिलाव भेज दिया गया। वही संजू साव के शव को बिहार शरीफ अस्पताल से पोस्टमार्टम के बाद ठेले पर ही अंबेर मोहल्ले तक ले जाया गया।जबकि नालंदा सांसद द्वारा तीन शव वाहन उपलब्ध कराया गया।वावजूद शव वहां धूल फांक रहा है। परिजनों ने बताया कि शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की गई थी लेकिन परिजनों को एंबुलेंस मुहैया नहीं कराया गया। जिसके बाद परिजन ठेले पर ही शव को ले जाना मुनासिब समझा। वही ड्यूटी पर तैनात सरकारी चिकित्सक ने बताया कि सदर अस्पताल में शव वाहन की कमी है जिसके कारण इस तरह की परेशानियां सामने आ जाती है। परिजनों को शव ले जाने के लिए इंतजार करने को कहा गया था लेकिन परिजन शव को ठेले पर ले गए। आपको बता दें कि इसके पूर्व भी बिहार शरीफ सदर अस्पताल से इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। अभी 3 सितंबर को ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रहुई में शव को गोद में लेकर ढोने का मामला सामने आ चुका है।
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