बारिश में भीगते रहे, उम्मीद नहीं टूटी, 3 डिसमिल जमीन के लिए लगी लंबी कतार

Shreya Raj
बारिश के बीच 3 डिसमिल जमीन के लिए आवेदन जमा करने पहुंची महिलाओं की लंबी कतार।

NEWS PR डेस्क: पटना: दानापुर प्रखंड में शनिवार को बारिश के बीच भी भूमिहीन परिवारों की उम्मीद नहीं टूटी। बसेरा अभियान 2.0 के तहत तीन डिसमिल जमीन के लिए आवेदन जमा करने को बड़ी संख्या में लोग अंचल कार्यालय और विशेष शिविरों में पहुंचे। हाथों में जरूरी कागजात और आंखों में अपने आशियाने का सपना लिए लोग सुबह से ही कतार में खड़े रहे। रुक-रुककर हो रही बारिश के बावजूद कई महिलाएं घंटों अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। इन परिवारों के लिए यह महज आवेदन नहीं, बल्कि अपने पक्के घर के सपने की पहली सीढ़ी है।

10 नवंबर तक लिए जाएंगे आवेदन, अब तक एक हजार से अधिक आवेदन

अंचल प्रशासन की ओर से निर्धारित प्रारूप में भूमिहीन परिवारों से आवेदन लिए जा रहे हैं। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज भी जमा कराए जा रहे हैं। प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए शिविरों में अंचल निरीक्षक, राजस्व कर्मचारी, अमीन और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।

अंचल राजस्व अधिकारी अशोक कुमार मेहता ने बताया कि बसेरा अभियान 2.0 के तहत तीन डिसमिल जमीन के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 10 नवंबर निर्धारित है और अब तक एक हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।

स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन के बाद होगा भूमि आवंटन

अशोक कुमार मेहता के अनुसार, आवेदन जमा होने के बाद पात्र लाभुकों का स्थलीय निरीक्षण और भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र पाए जाने वाले परिवारों को नियमानुसार निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। फिलहाल योजना आवेदन और सत्यापन के चरण में है।

पात्रता की जांच पूरी होने और स्थल सत्यापन के बाद ही वास्तविक भूमि आवंटन किया जाएगा। प्रशासन की ओर से शिविरों में आवेदन प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई है।

पॉलिथीन और झोपड़ी में गुजर रही जिंदगी, पक्के घर की आस

दानापुर प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में ऐसे कई भूमिहीन परिवार हैं, जो वर्षों से नहर, आहर और पइन के किनारे अस्थायी ठिकाने बनाकर रहने को मजबूर हैं। किसी के सिर पर पॉलिथीन की छत है तो कोई झोपड़ी में परिवार के साथ जीवन गुजार रहा है।

ऐसे लोगों के लिए तीन डिसमिल जमीन मिलने की उम्मीद केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि अपना घर और सम्मानजनक जीवन पाने की आस है।

बारिश में भी कतार में खड़े इन लोगों की उम्मीद अब इस बात पर टिकी है कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें अपनी जमीन मिले और वे पॉलिथीन की छत से निकलकर अपने पक्के घर की चौखट तक पहुंच सकें। पटना से पशुपतिनाथ शर्मा की रिपोर्ट।

दानापुर से रिपोर्टर: पशुपतिनाथ

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