बिहार में अब सेटेलाइट से होगी पुलों की निगरानी, इजराइल की तकनीक पर सम्राट सरकार का फोकस

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 29 मई। बिहार में लगातार सामने आ रही पुलों की खराबी और हादसों की घटनाओं के बाद राज्य सरकार अब पुलों की निगरानी के लिए हाईटेक तकनीक अपनाने की तैयारी में है। पथ निर्माण विभाग पुलों की सुरक्षा जांच के लिए सेटेलाइट तकनीक के इस्तेमाल पर काम कर रहा है। इसको लेकर इजराइल के विशेषज्ञों से संपर्क किया गया है और तकनीकी अध्ययन शुरू कर दिया गया है।

दरअसल, हाल के महीनों में बिहार के कई पुलों में दरार, झुकाव और संरचनात्मक कमजोरी की घटनाएं सामने आई हैं। भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु का एक स्पैन गंगा नदी में गिरने के बाद विभाग और सरकार दोनों सतर्क हो गए हैं। इसके बाद पुलों की मॉनिटरिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया गया।

पथ निर्माण विभाग और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अधिकारियों ने इजराइल के विशेषज्ञों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक भी की है। बैठक में यह समझने की कोशिश की गई कि सेटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली बिहार के पुलों की सुरक्षा जांच में कितनी कारगर साबित हो सकती है।

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विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अब राज्य के सभी पुलों का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण किया जाएगा। इसी अभियान के तहत अब तक चार हजार से अधिक पुलों की जांच की जा चुकी है। फिलहाल किसी बड़े खतरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई पुलों की मरम्मत और निगरानी की जरूरत महसूस की गई है।

पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेंद्र ने कहा कि जिस तरह पुल निर्माण के दौरान इंजीनियरों की टीम जिम्मेदारी निभाती है, उसी प्रकार अब पुलों के नियमित निरीक्षण और सुरक्षा निगरानी की जवाबदेही भी तय की जाएगी। इसके लिए विभाग एक विस्तृत एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार सेटेलाइट तकनीक के जरिए पुलों की स्थिति का बेहद सूक्ष्म स्तर पर विश्लेषण किया जा सकता है। इसमें रडार इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल होता है, जो पुल में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी पकड़ लेती है। पुल में दरार, झुकाव या कंपन जैसी गतिविधियों का पता मिलीमीटर स्तर तक लगाया जा सकता है। कई बार ये बदलाव सामान्य निरीक्षण में दिखाई नहीं देते, लेकिन सेटेलाइट तकनीक उन्हें पहले ही चिन्हित कर लेती है।

हाल के दिनों में बिहार में कई पुलों से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं। तीन मई 2026 को भागलपुर में विक्रमशिला पुल का एक हिस्सा गंगा नदी में गिर गया था। वहीं 23 मई को गोपालगंज में गंडक नदी पर बने पुल के स्पैन में दरार आने के बाद आवागमन रोकना पड़ा। इससे पहले फरवरी 2026 में जमुई के खैरा-सोनो मार्ग स्थित नरियाना-मांगोबंदर पुल पर भी आवाजाही बंद करनी पड़ी थी।

आईआईटी पटना की एक रिपोर्ट में भी राज्य के आधा दर्जन पुलों की तत्काल मरम्मत की जरूरत बताई गई है। इसके बाद विभाग ने तकनीकी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है।

सरकार का मानना है कि सेटेलाइट तकनीक के इस्तेमाल से पुलों में खराबी का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। इससे मरम्मत कार्य पहले ही शुरू हो सकेगा और भविष्य में बड़े हादसों को टालने में मदद मिलेगी।

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