भ्रामक विज्ञापन पर बड़ी कार्रवाई, कोचिंग संस्थान पर लगा 15 लाख रुपये का जुर्माना

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने सिविल सेवा परीक्षा 2023 से जुड़े भ्रामक दावों के मामले में वाजिराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत की गई है।

क्या था मामला?

प्राधिकरण के अनुसार, संस्थान ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2023 के परिणाम घोषित होने के बाद अपनी वेबसाइट पर दावा किया कि 1016 रिक्तियों में से 645 से अधिक चयनित अभ्यर्थी उसके संस्थान से जुड़े थे। साथ ही टॉप 10, टॉप 50 और टॉप 100 रैंक में अपनी भागीदारी के दावे भी प्रकाशित किए गए।

जांच में पाया गया कि संस्थान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि सफल उम्मीदवारों ने संस्थान के किस विशेष पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था। वेबसाइट पर जीएस/फाउंडेशन कोर्स, प्री-फाउंडेशन, वैकल्पिक विषय, सप्ताहांत पाठ्यक्रम और जीएस प्री-कम-मेन्स जैसे कोर्स का प्रचार किया गया, जिससे यह धारणा बनी कि सभी सफल अभ्यर्थियों ने नियमित कोर्स किया था।

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“महत्वपूर्ण जानकारी” छिपाना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन

सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा कि सफल उम्मीदवार द्वारा चुना गया विशिष्ट पाठ्यक्रम अभ्यर्थियों के लिए “महत्वपूर्ण जानकारी” है। इसे छिपाना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

प्राधिकरण के मुताबिक, कई नामांकन प्रपत्रों में पाठ्यक्रम का उल्लेख ही नहीं था, जबकि कई में केवल “इंटरव्यू गाइडेंस” या “मॉक इंटरव्यू” लिखा मिला। इसका अर्थ यह है कि कुछ अभ्यर्थियों ने केवल साक्षात्कार चरण के लिए मार्गदर्शन लिया था, न कि प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए पूर्ण कोर्स किया था।

संस्थान 431 नामांकन फॉर्म में पाठ्यक्रम विवरण और तिथि का उल्लेख करने में विफल रहा। साथ ही, दावों के समर्थन में शुल्क रसीद या अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए। इससे विज्ञापनों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

दोहराया गया उल्लंघन

प्राधिकरण ने यह भी उल्लेख किया कि संस्थान पर इससे पहले भी सिविल सेवा परीक्षा 2022 से जुड़े भ्रामक विज्ञापन के लिए 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। पूर्व चेतावनी के बावजूद दोबारा इसी तरह के दावे करना पुनरावृत्ति माना गया, जिसके चलते इस बार अधिक दंड लगाया गया।

लाखों छात्रों पर असर

सीसीपीए ने कहा कि हर साल लगभग 11 लाख उम्मीदवार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे में भ्रामक विज्ञापन बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित कर सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अभ्यर्थी समय और धन दोनों का बड़ा निवेश करते हैं, इसलिए विज्ञापन में पारदर्शिता अनिवार्य है।

अब तक की कार्रवाई

प्राधिकरण अब तक विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 57 नोटिस जारी कर चुका है। 29 संस्थानों पर कुल 1,24,60,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है और उन्हें भ्रामक दावों को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया गया है।

सीसीपीए ने स्पष्ट किया है कि सभी कोचिंग संस्थानों को अपने विज्ञापनों में महत्वपूर्ण जानकारी का सत्य, पारदर्शी और पूर्ण प्रकटीकरण करना होगा, ताकि छात्र सूचित और निष्पक्ष शैक्षणिक निर्णय ले सकें।

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