कोरोना फिर दे रहा दस्तक: पटना और दक्षिण भारत से सामने आए नए मामले

Patna Desk
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जहां एक ओर देश धीरे-धीरे कोरोना की विनाशकारी लहरों को पीछे छोड़कर सामान्य दिनचर्या की ओर लौटने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर संक्रमण की हल्की सी चिंगारी फिर से भड़कती दिखाई दे रही है। पटना में मंगलवार को कोविड-19 के तीन नए मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले कंकड़बाग स्थित एक निजी लैब में जांच के दौरान सामने आए हैं।

सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार ने जानकारी दी कि अब तक जिले में कुल 64 संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं, जिनमें से 40 एक्टिव केस हैं। यह स्थिति फिर से यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या लोग सतर्कता छोड़कर लापरवाही की राह पर चल पड़े हैं?

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चिंता की बात यह भी है कि संक्रमितों की पहचान ज़्यादातर निजी लैब्स में हो रही है, जबकि पीएमसीएच जैसे बड़े सरकारी संस्थानों में अभी तक किसी भी मरीज की जांच नहीं हुई है। पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विजय कुमार के मुताबिक, पहले मरीजों की रैपिड किट से जांच होती है और अगर वह पॉजिटिव निकलता है तो फिर आरटी-पीसीआर से पुष्टि की जाती है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि लोग अभी भी शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

इस बीच दक्षिण भारत से भी कोविड को लेकर चिंताजनक खबरें सामने आई हैं। कर्नाटक में सोमवार को कोरोना के कारण दो और लोगों की मौत हो गई है, जिससे राज्य में कुल मृतकों की संख्या 11 हो गई है। मृतकों में बेलगावी की एक 51 वर्षीय महिला शामिल हैं, जो अन्य बीमारियों से भी जूझ रही थीं, और 79 वर्षीय एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत दक्षिण कन्नड़ जिले में कोविड निमोनिया के कारण हुई। दोनों को टीका लगाया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैक्सीनेशन के बावजूद भी सतर्कता बेहद जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम, सार्वजनिक स्थलों पर लापरवाही और समय पर जांच की कमी इस वायरस को दोबारा सक्रिय कर सकती है। फिलहाल यह धीमी गति से फैलता संक्रमण हमें आगाह कर रहा है कि महामारी अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। सावधानी और सतर्कता ही एकमात्र बचाव है।

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