बारिश में भी नहीं डिगी पितृभक्ति, देवघाट पर एक किलोमीटर तक पिंडदान; पहले दिन पहुंचे करीब दो लाख तीर्थयात्री

Shreya Raj
पितृपक्ष मेले के दौरान फल्गु नदी के देवघाट पर पिंडदान करते श्रद्धालु, बारिश के बीच भी जारी रहा पूर्वजों के लिए श्राद्ध और कर्मकांड।

NEWS PR डेस्क:गया: पितृपक्ष मेला शुरू होते ही गया जी में आस्था का बड़ा नजारा देखने को मिला। पहले ही दिन करीब दो लाख तीर्थयात्रियों के पहुंचने की बात सामने आई है। फल्गु नदी के देवघाट पर सुबह से ही पिंडदानियों की भीड़ उमड़ती रही। करीब एक किलोमीटर तक श्रद्धालु अपने पितरों के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते नजर आए। खास बात यह रही कि सुबह से रुक-रुककर बारिश होती रही। कभी रिमझिम फुहारें पड़ीं तो कभी तेज बारिश हुई, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था नहीं डिगी। गीली जमीन और बारिश के बीच लोग विधि-विधान से कर्मकांड पूरा करते रहे। पितृपक्ष मेले का आयोजन 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है।

बारिश के बीच भी देवघाट पर जारी रहा पिंडदान

देवघाट पर सुबह से ही अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। कोई अपने माता-पिता के लिए पिंडदान कर रहा था तो कोई दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए कर्मकांड करता दिखा।

श्रद्धालु अपने साथ पूजा सामग्री लेकर पहुंचे और पुरोहितों के निर्देश पर पिंडदान की प्रक्रिया शुरू की। बारिश के कारण रास्ते और जमीन गीली हो गई, इसके बावजूद लोग फल्गु नदी के तट पर बैठकर अपने पितरों के लिए कर्मकांड पूरा करते रहे।

राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बंगाल से पहुंचे पिंडदानी

राजस्थान के अलवर से आए राजेश कुमार पारिक अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए पिंडदान करने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पिंडदान की शुरुआत खीर से होती है और इसके बाद पुरोहित के निर्देश के अनुसार पूरा कर्मकांड किया जाता है।

छत्तीसगढ़ के शक्ति से आए अशोक बंसल का परिवार भी देवघाट पहुंचा। उन्होंने बताया कि करीब 102 साल बाद परिवार को ऐसा अवसर मिला है और इस बार 14 पूर्वजों का पिंडदान किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से आईं सरिता अग्रवाल भी अपने सास-ससुर और परिवार के अन्य बुजुर्गों के लिए पिंडदान करने पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह बचपन में भी गया जी आ चुकी हैं।

व्यवस्थाओं में जुटा प्रशासन, गयापाल ने बताया पिंडदान का महत्व

देवघाट और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन और नगर निगम की टीमें सफाई, सुविधा और आवाजाही की व्यवस्था पर नजर रखती रहीं। बारिश के बावजूद पिंडदानियों की संख्या में कमी नहीं दिखी।

तीर्थ पुरोहित और गयापाल पंडा गजाधर लाल कटारिया ने बताया कि अब तक कम से कम दो लाख से अधिक यात्री गयाजी पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पितृभक्त अपने पितरों के लिए कर्मकांड करने आए हैं। गजाधर लाल कटारिया के अनुसार, आज फल्गुनी तीर्थ का श्राद्ध है और गयाजी तीर्थ में इसका विशेष महत्व है।

उन्होंने गयाजी को भगवान विष्णु की नगरी बताते हुए कहा कि यहां गयासुर, धर्मशिला, गयापाल पुरोहित और भगवान विष्णु की धार्मिक परंपराओं का संगम माना जाता है। उनके मुताबिक, गयाजी में श्राद्ध और पिंडदान को पितरों की शांति और मोक्ष से जुड़ी आस्था के रूप में देखा जाता है।

गया से रिपोर्टर: आशीष कुमार

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