NEWS PR डेस्क: पटना, 26 जुलाई: बिहार सरकार ने राज्य में वन्यजीव संरक्षण, इको-टूरिज्म और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित बिहार राज्य वन्यप्राणी परिषद की 15वीं बैठक में 2600 मेगावाट क्षमता वाली दुर्गावती पंप भंडारण परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में वन्यजीव संरक्षण, प्रकृति आधारित पर्यटन (इको-टूरिज्म), हरित विकास तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तृत समीक्षा की गई। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने परिषद की बैठक से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों की जानकारी प्रस्तुत की।
पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे पर्यटन स्थल
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर रोजगार, निवेश और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर विकसित किए जाएं। उन्होंने पर्यटन परियोजनाओं को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाए तथा होटल, रेस्तरां, कैफेटेरिया, ट्रैकिंग और एडवेंचर टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
दुर्गावती और रोहतास क्षेत्र को मिलेगा नया पर्यटन स्वरूप
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि रोहतास एवं दुर्गावती क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और ग्रीन एनर्जी में संभावित निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए। दुर्गावती बांध के आसपास होटल, रेस्तरां और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएं। साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रैकिंग, भ्रमण और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
केसरिया स्तूप के संरक्षण के लिए संयुक्त प्रयास
बैठक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि विश्व के सबसे ऊंचे और महत्वपूर्ण बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के संरक्षण, विकास और पर्यटन की दृष्टि से संवर्धन के लिए दोनों विभाग संयुक्त रूप से कार्य करें।
प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से समृद्ध राज्य है। इन धरोहरों का संरक्षण करते हुए उन्हें पर्यटन के लिहाज से विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और बिहार की पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत होगी।
समयबद्ध क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी प्रस्तावों के समयबद्ध क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों पर व्यावसायिक गतिविधियों को सुव्यवस्थित ढंग से विकसित किया जाए ताकि पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद, विधायक शालिनी मिश्रा, विधायक वीरेंद्र सिंह, विधायक बाबू लाल शौर्य, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंद सिंह, मत्स्य पालन निदेशक तुषार सिंगला, पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नंदकिशोर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। परिषद के अन्य सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।