गंडक नदी का बढ़ा जलस्तर, CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण; कई जिलों में बाढ़ का खतरा

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क: बिहार में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से कई जिलों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद वाल्मीकिनगर गंडक बराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने का असर अब निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, जलजमाव और तटबंधों की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों को लेकर पूरी तरह अलर्ट रहने तथा संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी के निर्देश दिए।
5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बढ़ा दबाव
जल संसाधन विभाग के अनुसार, नेपाल के गंडक बेसिन में कम समय में हुई भारी बारिश के बाद 28 सितंबर की सुबह वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बराज पर करीब 13 घंटे तक पांच लाख क्यूसेक से अधिक और लगभग 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक से अधिक जलप्रवाह बना रहा। इसका असर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के निचले इलाकों में पड़ा है। बगहा गेज पर गंडक का जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया, जो 2024 के पिछले उच्चतम स्तर 90.90 मीटर से 0.35 मीटर अधिक है।
गोपालगंज और सारण में तटबंधों को नुकसान
गोपालगंज के बैकुण्ठपुर प्रखंड के शीतलपुर में गंडक के दाएं मुख्य तटबंध के अंदर बंधौली-शीतलपुर-फैजुल्लाहपुर जमींदारी बांध करीब छह मीटर तक टूट गया है। इससे आसपास के निचले इलाकों में पानी फैलने और संपर्क प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं सारण के मकेर प्रखंड के हैजलपुर में गंडक के दाएं सारण तटबंध के करीब आठ मीटर हिस्से में धंसान की सूचना है। बाढ़ निरोधक फाटक को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे पानी कंट्री साइड में फैल रहा है।
प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संवेदनशील और निचले इलाकों में लगातार निगरानी रखने, राहत सामग्री और बचाव दल तैयार रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल गंडक के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सक्रियता अहम होगी।

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