NEWS PR डेस्क: बेतिया: गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने पश्चिम चंपारण के दियारा इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंडक बराज से दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद योगापट्टी प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नदी का पानी अब आबादी वाले इलाकों में प्रवेश कर चुका है, जिससे सैकड़ों परिवार प्रभावित हैं। योगापट्टी प्रखंड के मदारपुर, खुटवानिया, जरलपुर, गजना, बैसिया और साईं बाजार समेत कई गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब 72 घंटे से लोग राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक पर्याप्त मदद नहीं पहुंच सकी है।

घरों में घुसा पानी, भोजन का संकट
बाढ़ का पानी कई घरों में प्रवेश कर जाने से लोगों के सामने खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि पानी के कारण खाना बनाना मुश्किल हो गया है और कई लोग सूखे भोजन के सहारे दिन गुजारने को मजबूर हैं। वहीं, कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट गया है। ग्रामीणों के आने-जाने का एकमात्र सहारा नाव रह गई है। कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं, जबकि कई लोग जान जोखिम में डालकर जरूरी कामों के लिए आवाजाही कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाया अनदेखी का आरोप
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीण पारस चौधरी और सुदामा चौधरी का कहना है कि उन्होंने कई बार बीडीओ और सीओ को फोन कर स्थिति की जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई अधिकारी गांव के अंदर पहुंचकर हालात का जायजा लेने नहीं आया। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी गांव के बाहर से ही स्थिति की जानकारी लेकर लौट जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द राहत सामग्री, सूखा राशन और सरकारी नावों की व्यवस्था करने की मांग की है।
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि दियारा क्षेत्र हर साल गंडक नदी की बाढ़ से प्रभावित होता है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इस बार भी बाढ़ से बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और अन्य ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज करने की अपील की है, ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके।पश्चिम चंपारण से मोहम्मद इम्तियाज की रिपोर्ट
