NEWS PR डेस्क: गया की धरती से निकले 9 साल के रामकृष्ण अपनी सुरीली आवाज और बहुमुखी प्रतिभा से संगीत की दुनिया में अलग पहचान बना रहे हैं। महज ढाई साल की उम्र में संगीत की ओर आकर्षित हुए रामकृष्ण आज सात भाषाओं में गाना गाते हैं। हिंदी के साथ गुजराती, मराठी, बांग्ला, हरियाणवी, पंजाबी और राजस्थानी में भी उनकी गायकी लोगों को प्रभावित करती है। शास्त्रीय संगीत से लेकर सुगम संगीत तक उनकी प्रतिभा देखने को मिलती है। यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उन्हें दो बार सम्मानित कर चुकी हैं। खास बात यह है कि रामकृष्ण की 6 साल की जुड़वां बहनें राधा कृष्ण और राधे कृष्ण भी संगीत के क्षेत्र में उनका साथ दे रही हैं।
ढाई साल की उम्र से शुरू हुआ संगीत का सफर
रामकृष्ण को संगीत में रुचि तब जगी, जब वह महज ढाई साल के थे। स्कूल में सुने गीत, भजन और कविताओं को वह जल्दी याद कर लेते थे और फिर उन्हें गुनगुनाने लगते थे। परिवार ने उनकी इस प्रतिभा को पहचाना और आगे बढ़ाने का फैसला किया।
गया में संगीत की शुरुआती शिक्षा लेने के बाद रामकृष्ण को बनारस घराने की शास्त्रीय संगीत परंपरा से प्रशिक्षण दिलाया गया। महज 5 साल की उम्र में उन्हें बड़े मंचों पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिलने लगा।
कई भाषाओं और संगीत विधाओं में बनाई पकड़
रामकृष्ण की गायकी का दायरा केवल एक शैली तक सीमित नहीं है। वह शास्त्रीय संगीत, भजन, गजल, लोकगीत और सुगम संगीत में भी प्रस्तुति देते हैं। सात भाषाओं में गायन करने वाले रामकृष्ण की प्रतिभा को कई मंचों पर सम्मान मिला है।
यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उन्हें दो बार सम्मानित कर चुकी हैं। उन्हें यूपी गौरव अलंकरण, बिहार प्रतिभा सम्मान और सनातन शक्ति सम्मान सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव 2025 में भी उन्हें उपशास्त्रीय संगीत के लिए सम्मानित किया गया। परिवार के अनुसार, राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए भी उनके नाम की अनुशंसा की गई है।
जुड़वां बहनें भी सुर और साज में देती हैं भाई का साथ
रामकृष्ण केवल संगीत प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं हैं। वह सामाजिक जागरूकता, देशभक्ति और पर्यावरण जैसे विषयों पर स्वरचित गीत भी गाते हैं। उनका सपना है कि संगीत के माध्यम से गया, बिहार और भारत का नाम दुनिया भर में रोशन करें।
उनकी 6 साल की जुड़वां बहनें राधा कृष्ण और राधे कृष्ण भी संगीत के साथ कई वाद्य यंत्रों की शिक्षा ले रही हैं। दोनों बहनें अपने भाई के गीत सीखकर उसकी प्रस्तुतियों में साथ देती हैं।
तीनों भाई-बहन जब एक साथ सुर और साज छेड़ते हैं तो उनकी प्रस्तुति किसी पूरी संगीत मंडली जैसी नजर आती है। माता कीर्ति सागर को उम्मीद है कि आने वाले समय में तीनों बच्चे संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाएंगे।
गया से रिपोर्टर: आशीष कुमार