NEWS PR डेस्क: खगड़िया, 31 मई। पुलिस अभिरक्षा से फरार हुए युवक सौरव कुमार की तालाब में डूबने से हुई मौत और उसके बाद मोरकाही थाना पर हुए हंगामे के मामले में पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने पर दो दारोगा सहित पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।
एसपी राकेश कुमार ने बताया कि मोरकाही थाना क्षेत्र में हुई इस घटना को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
कार्रवाई की जद में आए पुलिसकर्मियों में दारोगा अगमलाल पांडेय, रामकुमार पासवान, सिपाही अंकित कुमार, मनोज कुमार पासवान और चौकीदार अशोक पासवान शामिल हैं। इन पर ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस ने 29 मई की रात पुलिस पर हमले के एक मामले में सबलपुर निवासी सौरव कुमार और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि हिरासत के दौरान सौरव पुलिस की निगरानी से बचकर भाग निकला। पुलिस से बचने के प्रयास में उसने पास स्थित मालती धार तालाब में छलांग लगा दी, जहां डूबने से उसकी मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मोरकाही थाना का घेराव कर दिया। देर रात तक थाना परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही और लोगों ने शव के साथ प्रदर्शन किया।

घटना उस समय और चर्चा में आ गई जब थाना प्रभारी अंतिमा कुमारी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सरकारी पिस्टल लहराती दिखाई दीं। हालांकि थानाध्यक्ष ने अपने बचाव में कहा कि स्थिति पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी थी। बड़ी संख्या में लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, थाना परिसर में प्रवेश कर गए थे। ऐसे में आत्मरक्षा और सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम उठाया गया।
वहीं, थाना पर हंगामा और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में भी पुलिस कार्रवाई की तैयारी कर रही है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों के आधार पर करीब दो दर्जन लोगों की पहचान की है। इनके खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
एसपी ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी निर्दोष को परेशान न किया जाए और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।