तकनीकी क्रांति की ओर भारत, एआई और क्वांटम मिशन से मिलेगी नई उड़ान

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली, 27 जून। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करेंगी। उन्होंने कहा कि भारत इन अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से अग्रणी देशों की श्रेणी में शामिल हो रहा है।

एक प्रमुख समाचार चैनल द्वारा आयोजित मीडिया सम्मेलन में अनौपचारिक बातचीत के दौरान डॉ. सिंह ने बताया कि वर्ष 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) ने तीन वर्षों के भीतर अपने आधे से अधिक लक्ष्यों को हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि क्वांटम-सुरक्षित संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जो रक्षा और रणनीतिक संचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु और क्वांटम तकनीकें आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन और आर्थिक विकास की आधारशिला बनेंगी। यदि कोई देश इन क्षेत्रों में पीछे रह जाता है तो उसे विकास और सुरक्षा दोनों में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि एआई अब हर क्षेत्र के लिए आवश्यक उपकरण बनती जा रही है। शासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और अनुसंधान सहित सभी क्षेत्रों में इसका व्यापक उपयोग होगा। इसके लिए भारत डिजिटल अवसंरचना, डेटा संसाधनों और कंप्यूटिंग क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए नीतिगत सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण से स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिली है, जबकि परमाणु क्षेत्र में हालिया सुधार निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा केंद्रों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि इस नीति ने छात्रों को बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। इससे नवप्रवर्तकों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार अनुसंधान एवं विकास को केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ा रही है, जिससे भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत होगा।

युवाओं का आह्वान करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी के पास ज्ञान और तकनीकी संसाधनों तक अभूतपूर्व पहुंच है। उन्होंने छात्रों से वैज्ञानिक सोच विकसित करने और भारत को नवाचार आधारित वैश्विक शक्ति बनाने में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा, अनुसंधान, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों में किए जा रहे सुधार भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करेंगे।

Share This Article