लैंड फॉर जॉब केस: दिल्ली कोर्ट में आज अहम सुनवाई, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की पेशी संभव

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के अदालत में पेश होने की संभावना है। दोनों नेता एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली प्रवास के दौरान लालू यादव अपना नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी कराएंगे।

कोर्ट ने इससे पूर्व सभी आरोपियों को 25 फरवरी तक सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया था। इस मामले में तेजश्वी यादव और तेज प्रताप यादव पहले ही अदालत में पेश हो चुके हैं। माना जा रहा है कि आज की सुनवाई में आरोप तय करने की प्रक्रिया पर अहम बहस हो सकती है। अदालत ने संकेत दिया है कि 9 मार्च से डे-टू-डे ट्रायल शुरू किया जाएगा, जिससे साफ है कि मामला अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है।

पिछली सुनवाई में क्या हुआ?

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16 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वे ट्रायल का सामना करेंगे और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। राबड़ी देवी ने भी कहा था कि वे कानूनी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं और अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगी।

कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

29 जनवरी की सुनवाई में स्पेशल जज विशाल गोगने ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणियां की थीं। अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि सरकारी नौकरियों के बदले जमीन या संपत्ति लेने की साजिश रची गई। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि कथित तौर पर सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर परिवार के नाम अचल संपत्तियां अर्जित की गईं।

CBI की चार्जशीट पर अदालत की राय

अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर चार्जशीट और प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। कोर्ट के अनुसार, मामला केवल अनियमित नियुक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जमीन के हस्तांतरण, कीमतों में कथित गड़बड़ी, परिवार और सहयोगियों के नाम संपत्ति ट्रांसफर तथा उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच जरूरी है।

हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। बचाव पक्ष को ट्रायल के दौरान CBI के साक्ष्यों और दस्तावेजों को चुनौती देने का पूरा अवसर मिलेगा। साथ ही अभियोजन स्वीकृति से जुड़े लंबित मुद्दों पर CBI को प्रक्रिया तेज करने का निर्देश भी दिया गया है।

राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मामला

यह केस राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें एक बड़े राजनीतिक परिवार के कई सदस्य आरोपी हैं। अब सबकी निगाहें आज की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि आरोप किस आधार पर औपचारिक रूप से तय किए जाएंगे और ट्रायल किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

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