गया में गरजीं मैथिली ठाकुर: महिला विरोधी सोच पर सख्त रुख

महिलाओं के सम्मान से समझौता नहीं, विकास ही युवाओं की प्राथमिकता: मैथिली ठाकुर

Rashmi Tiwari
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अलीनगर की विधायिक मैथिली ठाकुर ने रविवार को गया सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई अहम और ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने विकास, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और विपक्षी नेताओं के बयानों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। विधायिका ने कहा कि आज का युवा केवल नारों और वादों से प्रभावित नहीं होता, बल्कि वह जमीनी स्तर पर हो रहे विकास कार्यों को देखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पप्पू यादव के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पप्पू यादव के हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मैथिली ठाकुर ने इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक और अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न सिर्फ एक महिला, बल्कि पूरे समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। उन्होंने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार ने उन्हें सोच-समझकर राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया और हर परिवार अपने मूल्यों के अनुसार निर्णय लेता है। विधायिका ने कहा कि ऐसे बयान देने वालों को माफी मांगनी चाहिए, हालांकि यह कृत्य माफी के योग्य भी नहीं है।
बच्चों की संख्या तय करना पूरी तरह से व्यक्तिगत निर्णय
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के “चार बच्चे” वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों की संख्या तय करना पूरी तरह से व्यक्तिगत निर्णय है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के युवा की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं—वे बेहतर रोजगार, बुनियादी ढांचे और समग्र विकास की अपेक्षा रखते हैं। समाज और धर्म की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन आर्थिक और सामाजिक प्रगति भी उतनी ही जरूरी है।
विपक्ष पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप
वहीं नारी शक्ति वंदना अधिनियम का जिक्र करते हुए विधायिका ने विपक्ष पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिलाएं इस अपमान का जवाब समय आने पर जरूर देंगी। वहीं, पश्चिम बंगाल की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वहां कानून-व्यवस्था कमजोर नजर आ रही है। उन्होंने दावा किया कि बढ़ती हिंसा के कारण वे खुद वहां जाने में असहज महसूस करती थीं। विधायिका के अनुसार, बंगाल की जनता—विशेषकर महिलाएं—अब बदलाव चाहती हैं और नई उम्मीदों के साथ राजनीतिक विकल्पों की ओर देख रही हैं।

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