बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत एवं पुलिस महानिदेशक विनय कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों, वरीय पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक हाल ही में आयोजित 52वीं प्रगति (PRAGATI) समीक्षा बैठक में साइबर अपराध तथा डिजिटल अरेस्ट को लेकर दिए गए निर्देशों के अनुपालन और राज्य की तैयारियों की समीक्षा हेतु बुलाई गई थी।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने साइबर अपराध से आम जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर है, जिस पर किसी भी प्रकार की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। उन्होंने निर्देश दिया कि इस नंबर का प्रचार-प्रसार आम जन-जीवन से जुड़ी हर वस्तु और स्थान पर किया जाए ताकि हर नागरिक को इसकी जानकारी हो:

बिजली बिल और मोबाइल ऐप: बिजली बिलों पर 1930 नंबर को स्पष्ट रूप से छापा जाए और बिजली बिल रिचार्ज के लिए इस्तेमाल होने वाले मोबाइल ऐप्स पर भी इसका बैनर/मैसेज प्रदर्शित किया जाए।
सुधा डेयरी उत्पाद एवं बूथ: बिहार के घर-घर तक पहुँचने वाले ‘सुधा’ दूध और अन्य उत्पादों की पैकेजिंग पर तथा सुधा पार्लर/बूथों पर 1930 हेल्पलाइन नंबर का प्रमुखता से प्रदर्शन किया जाए।
नगर निगम के डिजिटल डिस्प्ले: शहरों में नगर निगम के डिजिटल होर्डिंग्स, एलइडी स्क्रीन और अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर साइबर जागरूकता संदेश और 1930 नंबर प्रदर्शित किया जाए।
साप्ताहिक जागरूकता अभियान: स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में ‘साइबर मंगलवार’ जैसे जागरूकता कार्यक्रमों को लगातार जारी रखा जाए।
बैठक के दौरान राज्य में साइबर अपराध नियंत्रण की स्थिति, तकनीकी पोर्टल्स के उपयोग और ग्राउंड एक्शन की विस्तृत जानकारी एक प्रस्तुतिकरण के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों, वरीय पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को दी गई ।
ऑपरेशन साइबर प्रहार: राज्य में संगठित साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 6,251 म्यूल बैंक खातों का सत्यापन किया गया, 702 लोगों पर कानूनी कार्रवाई की गई और 507 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
राष्ट्रीय साइबर हॉटस्पॉट : देश के शीर्ष साइबर हॉटस्पॉट जिलों में बिहार के नवादा (रैंक 2), नालंदा (रैंक 4), पटना (रैंक 7) और शेखपुरा (रैंक 15) शामिल हैं। इसके अलावा पटना एटीएम और चेक से पैसे निकासी के मामले में देश के शीर्ष स्थानों में है। पुलिस अधिकारियों को इन हॉटस्पॉट क्षेत्रों में कड़ी निगरानी और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
धन वापसी एवं शिकायत निवारण:
Money Restoration Module (MRM): बिहार में साइबर पीड़ितों को पैसे वापस दिलाने के लिए 16,593 मामले तैयार हैं, जिनमें से 5,642 मामलों पर पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई कर ₹224.53 लाख रुपये की बहाली के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
Grievance Redressal Module (GRM): बैंकों द्वारा अनुचित फ्रीजिंग से जुड़ी शिकायतों में बिहार ने 98% से अधिक का निष्पादन कर बेहतर प्रदर्शन किया है।
समन्वय पोर्टल एवं सहयोग पोर्टल:
समन्वय (CIAR): अन्य राज्यों से प्राप्त अंतर-राज्यीय जांच अनुरोधों (CIAR) का बिहार पुलिस ने 90.22% मामलों में सफलतापूर्वक निष्पादन किया है।
सहयोग: गैर-कानूनी और भ्रामक साइबर कंटेंट को हटाने के लिए ‘सहयोग’ पोर्टल के माध्यम से बिहार से भेजे गए अनुरोधों पर 75.65% URLs को सफलतापूर्वक हटवाया गया है।
Capacity Building : बिहार पुलिस के 4,221 से अधिक पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराध अनुसंधान और साइबर सुरक्षा का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
मुख्य सचिव द्वारा जारी महत्वपूर्ण निर्देश-
e-Zero FIR एवं CCTNS एकीकरण: साइबर अपराध (विशेषकर 1 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी) के मामलों में e-Zero FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और इसे नियमित FIR में तुरंत परिवर्तित किया जाए।
बैंकों और DLBC/SLBC के साथ समन्वय: जिलाधिकारियों (DMs) को निर्देश दिया गया कि वे जिला स्तरीय बैंकर्स समिति (DLBC) की बैठकों के माध्यम से म्यूल खातों को फ्रीज करने और धोखाधड़ी की राशि पीड़ितों को लौटाने की प्रक्रिया में तेजी लाएं।
फ़र्ज़ी सिम एवं POS पर नकेल: राज्य में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम बेचने वाले एजेंटों और गैंग्स के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।