NEWS PR डेस्क : : विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने जालौन में पार्टी के मिलन समारोह की अनुमति निरस्त किए जाने के खिलाफ जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना दिया। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए कहा कि सरकार के इशारे पर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले कार्यक्रम की विधिवत अनुमति दी गई और कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले अचानक अनुमति निरस्त कर दी गई। यह कार्रवाई पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक दबाव का परिणाम है।
मुकेश सहनी ने कहा कि 24 अगस्त को कालपी रोड स्थित जयसवाल मंदिर/टावर में पार्टी के मिलन समारोह के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी। जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से 23 अगस्त को कार्यक्रम के लिए अनुमति प्रदान की गई। इसके बाद अचानक प्रशासन ने अनुमति रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।

प्रशासन ने पुलिस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भीड़, भगदड़ और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई है।उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन को कार्यक्रम में किसी प्रकार की आशंका थी तो अनुमति देने से पहले जांच क्यों नहीं की गई? कार्यक्रम के लिए अनुमति देने के बाद अंतिम समय में उसे रद्द करना बताता है कि इसके पीछे कोई प्रशासनिक मजबूरी नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव है।

वीआईपी प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में किसी राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम करने और जनता से संवाद करने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सरकार का राजनीतिक औजार बनने के बजाय निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब कार्यक्रम की अनुमति विधिवत दी जा चुकी थी, तब उसे अचानक रद्द करने का आधार क्या बना?

सहनी ने कहा कि वह और उनके कार्यकर्ता इस तरह की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हम गरीबों, वंचितों और आम लोगों की आवाज उठाने के लिए राजनीति करते हैं। सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।”

उन्होंने कहा कि जालौन में धरना लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई है। प्रशासन तत्काल अपना फैसला वापस ले और राजनीतिक दबाव में काम करना बंद करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार दमन किया गया तो वीआईपी इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन करेगी।