NEWS PR डेस्क : अब जमीन खरीदने वालों को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी, क्योंकि किसी विवाद की स्थिति में उनका रिकॉर्ड सरकारी प्रणाली में सुरक्षित रहेगा। दलालों के लिए नकद में बड़े सौदे करना मुश्किल होगा और टैक्स चोरी पर नियंत्रण होगा। छोटे और मध्यम स्तर के लेन-देन भी निगरानी में आने से जमीन बाजार में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
बिहार में जमीन की खरीद-फरोख्त अब पहले जैसी आसान और अनौपचारिक प्रक्रिया नहीं रही। सरकार ने रजिस्ट्री को वित्तीय पहचान से जोड़ते हुए नया नियम लागू किया है। अब 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की जमीन, मकान या किसी अन्य अचल संपत्ति की रजिस्ट्री के समय खरीदार और विक्रेता दोनों को अपना पैन कार्ड देना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था के बाद बड़ी रकम की डील को छुपाना लगभग असंभव हो जाएगा।
यदि किसी व्यक्ति के पास पैन कार्ड नहीं है, तो उसे वैकल्पिक घोषणा पत्र जमा करना होगा, जिसकी जानकारी संबंधित विभाग तक पहुंचेगी। इसका मतलब है कि संपत्ति खरीदने का कार्य अब सिर्फ कागज पर हस्ताक्षर करना नहीं, बल्कि वित्तीय रिकॉर्ड में दर्ज लेन-देन सुनिश्चित करना भी होगा। इससे हर बड़ी डील का डिजिटल ट्रैक तैयार होगा और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों के लिए डेटा जुटाना आसान होगा।
लंबे समय से जमीन के कारोबार में बेनामी सौदे, फर्जी मालिकाना हक और नकद लेन-देन की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार असली मालिक को बाद में पता चलता था कि उसकी जमीन किसी और के नाम हो चुकी है। नए नियम का उद्देश्य इसी तरह की धोखाधड़ी पर रोक लगाना है। अब हर सौदे में खरीदार और विक्रेता की पहचान और वित्तीय जानकारी दर्ज होगी, जिससे फर्जी रजिस्ट्री कराना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा आम खरीदारों को मिलेगा।
इस बदलाव के बाद जमीन खरीदते समय सुरक्षा बढ़ जाएगी, क्योंकि विवाद की स्थिति में रिकॉर्ड सरकारी प्रणाली में सुरक्षित रहेगा। दलालों के लिए नकद में बड़ी डील करना कठिन होगा और टैक्स चोरी पर नियंत्रण रहेगा। छोटे और मध्यम स्तर के सौदे भी निगरानी में आएंगे, जिससे जमीन बाजार में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।