NEWS PR डेस्क: पटना, 26 जून। बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में विश्वविद्यालयों के लिए नया कानून लाने की तैयारी शुरू हो गई है। यह नया अधिनियम देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं को आधार बनाकर तैयार किया जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सहमति बनी।
पटना स्थित बिहार लोक भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में विश्वविद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था, नामांकन, शिक्षकों की नियुक्ति, वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक सुधार और डिजिटल गवर्नेंस सहित कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी उच्च शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे बिहार के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। वहीं राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों में ‘समर्थ पोर्टल’ के 26 मॉड्यूल 31 दिसंबर तक पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य के 211 नए डिग्री कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की संविदा पर नियुक्ति केंद्रीयकृत प्रक्रिया के तहत की जाएगी। इसके अलावा लंबे समय से लंबित डिग्रियों के वितरण को मिशन मोड में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि 30 सितंबर तक सभी लंबित डिग्रियां विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने की योजना है।
प्रशासनिक सुधारों के तहत शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले एवं पदोन्नति के लिए समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाएगी। सामान्य तबादले केवल जून माह में होंगे, जबकि विशेष परिस्थितियों में ही कुलाधिपति की पूर्व स्वीकृति से स्थानांतरण किया जा सकेगा।
बैठक में विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, डिजिटल प्रशासन, शैक्षणिक गुणवत्ता और सुशासन को मजबूत करने के लिए चल रही विभिन्न सुधार योजनाओं की भी समीक्षा की गई। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनेगी।
