नीतीश कुमार का नया पता, सत्ता और सियासत के बीच नया अध्याय

पड़ोसी बने पुराने साथी, क्या फिर बनेगी नई कहानी?

Rashmi Tiwari

बिहार की सियासत में आज एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव देखने को मिला। करीब 20 साल तक 1 अणे मार्ग में रहने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार अब नए पते 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो गए हैं। आज से यही उनका स्थायी निवास होगा। उनके साथ उनके बेटे निशांत कुमार भी इस नए आवास में रहेंगे।इस बदलाव ने सिर्फ उनका पता नहीं बदला, बल्कि राजनीतिक गलियारों में कई नई चर्चाओं को भी जन्म दे दिया है। अब नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव एक-दूसरे के पड़ोसी बन गए हैं, जिससे आने वाले समय में सियासी समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
डिप्टी सीएम विजेंद्र यादव के आवास पहुंचे पूर्व सीएम
बता दें कि शनिवार सुबह शिफ्टिंग की प्रक्रिया पूरी हुई। इससे पहले नीतीश कुमार डिप्टी सीएम विजेंद्र यादव के आवास पहुंचे, जहां वे करीब 10 मिनट तक रुके। इसके बाद वे सीधे अपने नए बंगले के लिए रवाना हो गए। वहीं डिप्टी सीएम विजय चौधरी भी उनसे मुलाकात के लिए 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पहुंचे।
नए बंगले में विधिवत पूजा-अर्चना
इससे पहले शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर नए बंगले में विधिवत पूजा-अर्चना की गई थी। इस दौरान बौद्ध भिक्षुओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। पूजा में निशांत कुमार भी मौजूद रहे। पूजा के बाद नीतीश कुमार वापस 1 अणे मार्ग लौट गए थे, जबकि शनिवार सुबह तक उनका सामान नए आवास में शिफ्ट किया गया। नए बंगले को फूलों से सजाया गया है और सुरक्षा के मद्देनज़र यहां पहले से ही Z+ श्रेणी की सुरक्षा तैनात कर दी गई है। बचा हुआ सामान भी आज ही शिफ्ट किए जाने की संभावना है।
जीतनराम मांझी को जिम्मेदारी सौंपी थी
गौरतलब है कि पिछले 20 सालों में यह दूसरा मौका है जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री आवास छोड़ा है। इससे पहले 2014 लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर जीतनराम मांझी को जिम्मेदारी सौंपी थी और खुद 7 सर्कुलर रोड स्थित इसी बंगले में करीब 8 महीने तक रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि अब इस नए पते पर शिफ्ट होने के बाद नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव पड़ोसी बन गए हैं। राबड़ी देवी का आवास यहां से महज दो घर की दूरी पर है। दोनों बंगलों के बीच की दूरी लगभग 200 मीटर बताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं, और इसे आने वाले समय में बिहार की राजनीति के समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

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