NEWS PR : बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई को रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के विश्वविद्यालयों में सात नए पाठ्यक्रम शुरू करने को मंजूरी दी गई है। इन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप का अवसर भी मिलेगा। इससे उच्च शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।
चार वर्षीय डिग्री में मिलेगा नया विकल्प
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को चार वर्षीय स्नातक डिग्री के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा। पाठ्यक्रमों को इस तरह तैयार किया जाएगा कि विद्यार्थियों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रहना पड़े, बल्कि उन्हें संबंधित क्षेत्र की व्यावहारिक जानकारी भी मिल सके।
पढ़ाई के साथ अप्रेंटिसशिप पर जोर
नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अप्रेंटिसशिप का मौका मिलेगा। इससे छात्र अपने चुने हुए क्षेत्र में काम करने का अनुभव हासिल कर सकेंगे। विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में यह व्यावहारिक अनुभव उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
रोजगारपरक शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
सात नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी मिलने से बिहार में रोजगारपरक उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मौजूदा समय में युवा डिग्री के साथ कौशल और काम का अनुभव भी चाहते हैं। ऐसे में नई व्यवस्था विद्यार्थियों को शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करने में मदद कर सकती है।
सरकार और विश्वविद्यालयों की ओर से उच्च शिक्षा को बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। नए पाठ्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को उद्योग और रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की कोशिश होगी।
जानकारों के मुताबिक, यदि इन पाठ्यक्रमों में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और प्रभावी अप्रेंटिसशिप की व्यवस्था सुनिश्चित होती है, तो इसका सीधा लाभ बिहार के युवाओं को मिल सकता है। इससे डिग्री के साथ कौशल और कार्य अनुभव हासिल करने का रास्ता भी मजबूत होगा।
डेस्क : NEWS PR