बेटे निशांत को शिक्षक ने पीटा, गुस्से में थे पिता नीतीश कुमार… फिर उठाया ऐसा कदम जो बन गया मिसाल

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार को उनकी सादगी, अनुशासन और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता है। लेकिन एक पिता के रूप में उनका धैर्य उस समय परखा गया, जब उनके इकलौते बेटे निशांत कुमार को स्कूल में बेरहमी से पीट दिया गया। यह घटना उस दौर की है जब नीतीश कुमार बिहार विधानसभा के सदस्य (विधायक) थे। उदय कांत की किताब ‘नीतीश कुमार: अंतरंग दोस्तों की नजर से’ में इस पूरे प्रसंग का विस्तार से जिक्र मिलता है।

माथे पर सूजन और तेज बुखार ने बढ़ाई चिंता

बताया जाता है कि उस समय निशांत कुमार पटना के एक प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल में दूसरी कक्षा के छात्र थे। शांत स्वभाव के निशांत को किसी बात पर एक शिक्षक ने छड़ी से इतनी जोर से पीट दिया कि उनके माथे पर बड़ा सा गूमड़ निकल आया। स्कूल से घर लौटने तक उन्हें तेज बुखार भी हो गया।

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शाम को जब नीतीश कुमार घर पहुंचे और बेटे की हालत देखी, तो एक पिता के तौर पर उन्हें गहरा दुख और गुस्सा दोनों हुआ। उस समय वे विधायक थे, इसलिए चाहें तो स्कूल जाकर कड़ा विरोध कर सकते थे। उनके कुछ करीबी लोगों ने भी स्कूल प्रबंधन से शिकायत करने की सलाह दी।

बिना विवाद के लिया सख्त फैसला

हालांकि नीतीश कुमार ने गुस्से में कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने शांत रहकर एक अलग रास्ता चुना। उनका मानना था कि जिस स्कूल में बच्चों को प्यार और समझ के बजाय डर और मार से पढ़ाया जाता है, वहां उनका बेटा नहीं पढ़ेगा।

उन्होंने बिना किसी विवाद के सीधे स्कूल जाकर निशांत का नाम वहां से कटवा लिया। न उन्होंने अपनी राजनीतिक हैसियत का इस्तेमाल किया और न ही कोई हंगामा किया।

मसूरी के बोर्डिंग स्कूल में कराया दाखिला

बेटे की पढ़ाई और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार ने निशांत को पटना से दूर भेजने का फैसला किया। उन्होंने उनका दाखिला मसूरी के मानव भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल में कराया। हालांकि बोर्डिंग स्कूल में रहने के दौरान निशांत को घर से दूर रहने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

बताया जाता है कि हॉस्टल के बाथरूम दूर होने की वजह से उन्हें डर लगता था और एक बार एक शिक्षक ने उनका खिलौना भी लेकर अपने बेटे को दे दिया, जिससे वे काफी उदास हो गए। बाद में स्वास्थ्य कारणों से उन्हें वापस पटना बुला लिया गया और उनका दाखिला केंद्रीय विद्यालय में करा दिया गया।

यह घटना आज भी एक उदाहरण के रूप में देखी जाती है कि कैसे नीतीश कुमार ने गुस्से या प्रभाव का इस्तेमाल करने के बजाय शांत और सख्त निर्णय लेकर अपने बेटे के भविष्य को प्राथमिकता दी।

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