कबाड़ में तब्दील हुई नल-जल योजना की टंकी, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण

लाखों खर्च, लेकिन गांव प्यासा—योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर

Rashmi Tiwari
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पूर्वी चंपारण: प्रखंड क्षेत्र की सरैया गोपाल पंचायत अंतर्गत महमदी गांव के वार्ड नंबर-2 में ‘हर घर नल का जल’ योजना की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है। भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच ग्रामीणों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

लाखों की लागत से स्थापित पानी की टंकी और बिछाई गई पाइपलाइन के बावजूद गांव के किसी भी घर में अब तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना कागजों पर तो पूरी हो गई, लेकिन धरातल पर इसका लाभ आज तक नहीं मिला। स्थानीय लोगों के अनुसार, गर्मी बढ़ने के साथ कई चापाकल भी सूख चुके हैं या पानी देना बंद कर चुके हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। ऐसे में महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज के नलकूपों और चापाकलों से पानी ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, लाखों की लागत से बनी पानी की टंकी टूटकर गंदे पानी व कचरे के ढेर में तब्दील हो गई है।

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उच्चस्तरीय जांच की मांग
गांव में स्थापित पानी की टंकी की बदहाल स्थिति (जैसा कि तस्वीर 1001274163.jpg में देखा जा सकता है) योजना के रखरखाव और निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति विभागीय लापरवाही और सरकारी राशि के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है। जल संकट से परेशान ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषी अधिकारियों और संवेदकों पर कार्रवाई होनी चाहिए और जल्द से जल्द जलापूर्ति व्यवस्था बहाल की जाए।

वहीं, समाजसेवी शशि झा ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि पीएचईडी (PHED) विभाग के कनीय अभियंता को मामले की जांच करने और जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।मोतिहारी से संतोष राउत की रिपोर्ट

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