नेपाल-तिब्बत में प्राकृतिक घटना के बाद बढ़ा था खतरा, अब गंडक का जलस्तर तेजी से नीचे

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क : पटना/वाल्मीकिनगर: नेपाल और भारत के सीमावर्ती इलाकों, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए राहत की खबर है। गंडक (नारायणी) नदी के जलस्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर नदी का प्रवाह घटकर करीब 81 हजार क्यूसेक रह गया है। इसके साथ ही संभावित बड़े बाढ़ संकट का खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है।

नेपाल से आया पानी सुरक्षित निकला
नेपाल की त्रिशूली नदी से आया अतिरिक्त पानी नारायणी नदी के रास्ते आगे निकल चुका है। जलप्रवाह कम होने के बाद गंडक नदी के निचले इलाकों में तत्काल बड़े खतरे की आशंका कम हुई है। हालांकि, प्रशासन ने स्थिति को सामान्य मानते हुए भी निगरानी में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती है।
कैसे पैदा हुआ था फ्लैश फ्लड का खतरा?
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के समीप हुई प्राकृतिक घटना से हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में आए 4.4 तीव्रता के भूकंप के बाद पहाड़ और बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में जा गिरा। बर्फ और मलबे के नदी में जमा होने से पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया और कुछ समय के लिए एक तरह की अस्थायी जलरोक संरचना बन गई। इसके पीछे पानी का दबाव बढ़ता गया। बाद में इस अवरोध के टूटने से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह निकला।
इस तेज जलप्रवाह का असर नेपाल के रसुवा जिले में देखने को मिला, जहां ऊपरी क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बनी। हालांकि, निचले इलाकों में बारिश नहीं होने के कारण पानी तेजी से आगे बढ़ गया और बिहार में बड़े स्तर पर तबाही की आशंका फिलहाल टल गई।
बिहार में पहले ही बढ़ाई गई थी सतर्कता
घटना की सूचना के बाद बिहार सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी से जुड़े जिलों को अलर्ट मोड पर रखा था। प्रशासन की ओर से कई स्तरों पर तैयारियां की गईं।
तटबंधों की निगरानी: पश्चिमी चंपारण समेत गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में तटबंधों की सुरक्षा बढ़ाई गई।
निचले इलाकों पर नजर: संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।
राहत एवं बचाव दल तैयार: किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए टीमें अलर्ट रखी गईं।
प्रशासनिक निगरानी: जलस्तर और नदी के प्रवाह में होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
फिलहाल राहत, लेकिन निगरानी जारी
बता दें कि गंडक नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, नदी से जुड़े क्षेत्रों में अभी भी एहतियात बरती जा रही है। प्रशासन का फोकस जलस्तर, तटबंधों और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी पर है।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर प्रवाह घटकर करीब 81 हजार क्यूसेक रह गया है और नेपाल से आया तेज पानी आगे निकल चुका है। इसके बावजूद किसी भी नए बदलाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए प्रशासन को सतर्क रखा गया है।

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