NEWS PR डेस्क: बिहार के मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी की है।

इस योजना के तहत प्रदेश के 3588 मदरसों में कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इनमें 1942 अनुदान प्राप्त और 1646 गैर-अनुदानित मदरसे शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसे तकनीकी कौशल से लैस करना है, जिससे पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खुल सकें।
AI, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी तकनीक सीखेंगे विद्यार्थी
प्रारंभिक चरण में विद्यार्थियों को आधुनिक और रोजगार से जुड़े कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने की योजना है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन तकनीक, कोडिंग, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर शिक्षा, इलेक्ट्रिकल वायरिंग और अन्य तकनीकी ट्रेड में भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
NSIC के सहयोग से चलेगा कार्यक्रम
कौशल विकास कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए बिहार सरकार का अल्पसंख्यक कल्याण विभाग नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड (NSIC) के सहयोग से प्रशिक्षण संचालित करेगा। विभाग और NSIC के बीच इस संबंध में अगले सप्ताह समझौता ज्ञापन (MoU) होने की तैयारी है। इसके बाद मदरसों में प्रशिक्षण कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ने की तैयारी
सरकार का फोकस सिर्फ प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है। योजना के तहत प्रशिक्षित विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी तैयारी है। इसके लिए अलग-अलग जिलों में रोजगार मेलों का आयोजन किया जाएगा, जहां प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को कंपनियों और रोजगार के अन्य अवसरों से जोड़ा जाएगा।
रोजगारपरक शिक्षा पर जोर
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का मानना है कि तकनीकी और व्यावसायिक कौशल से विद्यार्थियों को बदलते रोजगार बाजार के लिए तैयार किया जा सकेगा। मदरसों में AI, ड्रोन, कोडिंग और इलेक्ट्रिक वाहन जैसी नई तकनीकों का प्रशिक्षण शुरू होने से विद्यार्थियों को आधुनिक क्षेत्रों में करियर बनाने के अवसर मिल सकते हैं। विभागीय मंत्री मो. जमा खान ने सभी मदरसों में कौशल विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। योजना लागू होने के बाद राज्य के हजारों विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी कौशल हासिल करने का अवसर मिलेगा।