NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आता दिख रहा है। विधायक दल में मतभेदों की चर्चा के बीच पार्टी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था और अलग संसदीय समूह के तौर पर मान्यता देने की मांग की है। साथ ही सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ जाने की इच्छा भी जताई है।
सूत्रों के मुताबिक, सांसदों ने अपने पत्र में वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार को बागी गुट का नेता मान्यता देने की मांग की है। इस समूह में कई प्रमुख सांसदों के शामिल होने की चर्चा है, जिससे टीएमसी नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है। हस्ताक्षर करने वालों में अरुप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी राॅय, जगदीश वसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, कालीपदा सोरेन, शर्मिला सरकार, जून मालिया, वापी हलदर, असित मल समेत 20 सांसद बताए जा रहे हैं।
घटनाक्रम ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब सोमवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बागी नेताओं की एक बैठक हुई। बैठक में राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय भी मौजूद थे। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा के सभापति से मुलाकात कर अपने पद से इस्तीफा दे दिया और टीएमसी छोड़ने की घोषणा कर दी। रॉय ने कहा कि उन्होंने अपने फैसले की जानकारी पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से दे दी है।

सुखेंदु शेखर रॉय ने संकेत दिया कि जिस तरह विधानसभा में राजनीतिक समीकरण बदले हैं, उसी तरह संसद में भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान को टीएमसी के भीतर जारी असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि पार्टी नेतृत्व ने सांसदों को साधने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन असंतुष्ट नेताओं को मनाने में सफलता नहीं मिल सकी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसदों का यह समूह औपचारिक रूप से अलग पहचान हासिल कर लेता है, तो यह टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इसके दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
