जहां कभी जंगल और पत्थर थे, आज लहलहाती खेती: रोहतास के महादेवा गांव ने रची सफलता की नई कहानी

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: कहते हैं कि यदि मेहनत ईमानदार हो और नीति सही दिशा में हो, तो बंजर जमीन भी सोना उगलने लगती है। इस कहावत को सच कर दिखाया है बिहार के रोहतास जिले के जमुहार पंचायत अंतर्गत महादेवा गांव के किसानों ने। कभी घने जंगल, पथरीली जमीन और वीरानी से पहचाने जाने वाले इस गांव ने आज आधुनिक खेती के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है

150 एकड़ जंगली जमीन बनी खेती योग्य

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत मिले सहयोग और किसानों की कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप करीब 150 एकड़ जंगली और बंजर भूमि को खेती योग्य बनाया गया। आज इस भूमि पर आधुनिक तकनीकों से खेती कर किसान प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी कर रहे हैं

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई ने बदली तस्वीर

जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत किसानों को ड्रिप (टपक) और स्प्रिंकलर इरिगेशन जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ा गया। आर्थिक बदहाली और बेरोजगारी से जूझ रहे करीब 100 किसानों ने दशकों से खाली पड़ी जमीन पर तरबूज और खरबूजे की खेती शुरू की। देखते ही देखते यह प्रयोग एक आंदोलन में बदल गया, जिसकी गूंज आसपास के गांवों और जिलों तक पहुंच चुकी है

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तरबूज-खरबूजा से लाखों की कमाई

किसानों का कहना है कि परंपरागत फसलों की तुलना में तरबूज और खरबूजे की खेती से उन्हें चार गुना तक अधिक मुनाफा हो रहा है। आधुनिक सिंचाई और तकनीकी मार्गदर्शन ने लागत घटाई और उत्पादन बढ़ाया, जिससे खेती अब घाटे का नहीं, बल्कि लाभ का सौदा बन गई है

स्ट्रॉबेरी की खेती से बदली जीवनशैली

सरकार की ओर से बोरवेल सबमर्सिबल पंप उपलब्ध कराए जाने के बाद गांव के 15 किसानों ने करीब 25 एकड़ भूमि में सामूहिक रूप से स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। इस खेती से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और कई परिवारों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है। कच्चे मकानों की जगह अब पक्के घर खड़े हो रहे हैं

जैविक खेती और सब्जी उत्पादन भी बना पहचान

महादेवा गांव के किसान अब धान, गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों का उत्पादन भी जैविक खाद के इस्तेमाल से कर रहे हैं। इसके साथ ही करीब 25 एकड़ में आधुनिक सब्जी खेती ने भी गांव को नई पहचान दिलाई है, जो अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है

किसानों की जुबानी सफलता

गांव के किसान आलोक कुमार बताते हैं कि ड्रिप इरिगेशन की मदद से सात एकड़ में तरबूज-खरबूजे की खेती कर वे न सिर्फ बेहतर आमदनी कर रहे हैं, बल्कि उसी आय से अपने बच्चों को उच्च शिक्षा भी दिला पा रहे हैं। वहीं, किसान अनिश कुमार सिंह का कहना है कि स्ट्रॉबेरी की खेती ने उनके जीवन का सपना पूरा किया और यह मॉडल अब अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहा है

महादेवा बना मॉडल गांव

महादेवा गांव आज सिर्फ रोहतास जिले के लिए ही नहीं, बल्कि बिहार और अन्य राज्यों के किसानों के लिए भी मॉडल गांव बनकर उभरा है। यह सफलता साबित करती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो और किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार हों, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदली जा सकती है

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