बिहार की महिलाएं अब ‘चुप रहने’ वालों में नहीं, हर महीने 14 हजार से अधिक महिलाएं दबा रही हैं पैनिक बटन!

Jyoti Sinha
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बिहार में सार्वजनिक परिवहन में सफर कर रही महिलाएं अब किसी भी तरह की बदसलूकी, अश्लील टिप्पणी या अनुचित व्यवहार पर तुरंत प्रतिक्रिया दे रही हैं। प्रदेश की सिटी राइड बसों में लगे पैनिक बटन महिलाओं के लिए न सिर्फ एक सहारा बने हैं, बल्कि अब यह महिला सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक, हर महीने औसतन 14,654 महिलाएं बस में यात्रा के दौरान इस आपात बटन का प्रयोग कर रही हैं। 2020 में शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत अब तक 8.4 लाख से ज्यादा बार महिलाएं इस बटन का उपयोग कर चुकी हैं।

पैनिक बटन ने बढ़ाया आत्मविश्वास

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इस तकनीक से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है। सिटी राइड बसों में लगे पैनिक बटन सीधे कंट्रोल और कमांड सेंटर से जुड़े हैं, जो किसी भी शिकायत की स्थिति में तुरंत अलर्ट जारी करता है और निगरानी टीम को सक्रिय कर देता है।

न केवल छेड़खानी, बल्कि कर्मचारी पर भी निगाह

दिलचस्प बात यह है कि पैनिक बटन का उपयोग केवल मनचलों के खिलाफ नहीं किया जा रहा है, बल्कि कई बार ड्राइवर या कंडक्टर की अनुचित भाषा या व्यवहार पर भी महिलाएं बटन दबाने से हिचक नहीं रही हैं। इससे यह साफ है कि महिलाएं अब अपनी सुरक्षा और सम्मान से किसी तरह का समझौता नहीं कर रहीं।

पटना सबसे आगे, 800 बसों में सिस्टम चालू

राज्य में करीब 800 से ज्यादा सिटी बसों में यह सुविधा उपलब्ध है, और इनमें सबसे अधिक मामले पटना जिले से दर्ज किए गए हैं। इससे साफ है कि राजधानी क्षेत्र में जागरूकता और रिस्पॉन्स दोनों बेहतर है।

कहां से आया यह आइडिया?

यह पूरी योजना निर्भया फंड के तहत शुरू की गई थी, जो निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की बड़ी पहल थी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में बसों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन लगाने का निर्णय लिया। बिहार के अलावा हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में भी यह सिस्टम लागू है।

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