ग्रामीण क्षेत्रों में 447 हाट और 278 बाजार विकसित करने की तैयारी, शेड-शौचालय-पेयजल के साथ जीविका दीदियों के लिए होंगी स्थाई दुकानें

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 25 फरवरी। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत राज्य में कृषि, पशुधन, मत्स्य और दूसरे अत्पादों की बिक्री के लिए 725 हाट और बाजार विकसित किए जाएंगे। इसमें अलग-अलग श्रेणी के 447 हाट और 278 बाजार होंगे। ग्रामीण स्तर पर हाट, बाजार विकसित करने की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग की होगी।

विभागीय प्रधान सचिव पंकज कुमार के अनुसार विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हाट-बाजार विकसित करने की योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। प्रथम चरण के लिए निर्धारित श्रेणियों में 20-49 डिसमिल के 136 हाट, 73 बाजार, द्वितीय श्रेणी में 50-99 डिसमिल के 125 हाट, 96 बाजार और तृतीय श्रेणी के एक एकड़ या इससे अधिक क्षेत्रफल वाले 186 हाट और 109 बाजार विकसित किए जाएंगे।

पहली श्रेणी के हाट और बाजार में शेड के साथ 5 चबूतरा, शौचालय-पेयजल की सुविधा, जीविका दीदियों के लिए 3 स्थाई दुकान, मल्टीपर्पस स्टोर, गार्बेज डिस्पोजल पिट, द्वितीय श्रेणी के हाट, बाजार में शेड के साथ 13 चबूतरा, शौचालय-पेयजल की सुविधा, जीविका दीदियों के लिए 4 स्थाई दुकान, कार्यालय, मल्टीपर्पस स्टोर, गार्बेज डिस्पोजल पिट और तृतीय श्रेणी में शेड के साथ 16 चबूतरा, शौचालय-पेयजल की सुविधा, जीविका दीदियों के लिए 6 स्थाई दुकानें, कार्यालय व 2 मल्टीपर्पस स्टोर के साथ गार्बेज डिस्पोजल पिट का निर्माण किया जाएगा।

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सभी विकसित हाट बाजारों को ई-नाम योजना से जोड़ने का काम कृषि विपणन निदेशालय, कृषि विभाग करेगा। हाट और बाजार को विकसित किए जाने के बाद स्वामित्व वाले विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी को हस्‍तगत किया जाएगा। इसके लिए जिला पदाधिकारी के द्वारा एक समिति गठित की जाएगी। इस समिति में विकसित भारत-जी राम जी के जिला स्तरीय पदाधिकारी, सहायक अभियंता/ कार्यपालक अभियंता, स्वामित्व वाले संबंधित विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी और जिला पदाधिकारी की ओर से मनोनीत वरीय उप समाहर्ता बतौर सदस्य होंगे।

योजना के प्रभावित क्रियान्‍वयन हेतु जिला स्‍तर पर संबंधित विभागों के साथ समन्‍वय स्‍थापित किया जायेगा तथा गुणवता सुनिश्चित करते हुए कार्यों की सतत निगरानी की जायेगी। ’मुख्‍यमंत्री महिला रोजगार योजना’ जहॉ महिलाओं को स्‍वरोजगार के लिये आर्थिक आधार देगी, वहीं ग्रामीण हाट उन्‍हें उत्‍पादों के विपणन हेतु स्‍थायी ढॉचागत बाजार और ग्राहकों तक पहुँच प्रदान करेगा। महिलाओं के साथ-साथ स्‍वयं सहायता समूहों और स्‍थानीय उत्‍पादकों को भी लाभ मिलेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की नये अवसर सृजित होंगे।

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