तेजस्वी यादव होंगे विपक्ष के राज्यसभा उम्मीदवार! राघोपुर सीट से राजश्री यादव को मिल सकता है मौका!

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: बिहार की राजनीति में इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर उनकी उम्मीदवारी को लेकर सहमति बन चुकी है और औपचारिक ऐलान जल्द हो सकता है। हालांकि अब तक पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में तेजस्वी यादव को विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों का भी समर्थन मिल सकता है। यदि ऐसा होता है तो राज्यसभा पहुंचने की उनकी राह और आसान हो जाएगी। इस संभावित कदम को बिहार की राजनीति में एक बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

राघोपुर सीट पर उपचुनाव की संभावना

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अगर तेजस्वी यादव राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते हैं तो उन्हें अपनी विधानसभा सीट राघोपुर छोड़नी होगी। ऐसे में राघोपुर में उपचुनाव तय माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस सीट से उनकी पत्नी राजश्री यादव को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। पार्टी के अंदर इस विकल्प पर मंथन शुरू होने की बात कही जा रही है, हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राघोपुर लंबे समय से आरजेडी का मजबूत गढ़ रहा है। ऐसे में पार्टी यहां अपनी पकड़ बरकरार रखने के लिए सोच-समझकर फैसला लेना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेजस्वी राज्यसभा जाते हैं और राघोपुर से राजश्री यादव को मैदान में उतारा जाता है, तो यह आरजेडी की दोहरी रणनीति साबित हो सकती है—एक ओर संसद के उच्च सदन में मजबूत उपस्थिति और दूसरी ओर अपने परंपरागत वोट बैंक को सुरक्षित रखने की कोशिश।

16 मार्च को होगा मतदान

राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है, जबकि 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 9 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 16 मार्च को प्रस्तावित है। जिन सीटों पर चुनाव होना है, वे वर्तमान में अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेम चंद गुप्ता, उपेंद्र कुशवाहा, हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर के पास हैं। इन सभी का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है।

अब सबकी नजर आरजेडी की आधिकारिक घोषणा पर टिकी है। यदि यह राजनीतिक समीकरण हकीकत में बदलता है, तो इसका असर न केवल राज्यसभा बल्कि बिहार विधानसभा की सियासत पर भी साफ दिखाई देगा।

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