नीतीश के बाद बिहार का अगला सीएम कौन? सम्राट-नित्यानंद के बीच उभरा एक नया नाम, बढ़ा सियासी सस्पेंस

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: बिहार की राजनीति इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। ऐसे में राज्य की सियासत में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर उनके बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

राजनीतिक समीकरणों को देखें तो एनडीए गठबंधन में इस समय भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है तो अगला मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है। पार्टी के भीतर ऐसे चेहरे की तलाश चल रही है जो विकास की राजनीति को आगे बढ़ाने के साथ-साथ जनता की उम्मीदों पर भी खरा उतर सके।

भाजपा में कई नाम चर्चा में

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सीएम पद को लेकर भाजपा के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, विजय कुमार सिन्हा, राम कृपाल यादव, जनक राम और कृष्ण कुमार ऋषि जैसे नाम शामिल हैं।

वहीं महिला नेताओं में रेणु कुशवाहा, रमा निषाद और श्रेयसी सिंह के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। ये सभी नेता संगठन और सरकार में मजबूत पकड़ रखते हैं।

चर्चा में आया एक और नाम

इन तमाम नामों के बीच एक और नाम चुपचाप राजनीतिक गलियारों में उभरता नजर आ रहा है— शाहनवाज हुसैन। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन को भी संभावित मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।

वे भाजपा के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में गिने जाते हैं और माना जाता है कि उनकी छवि पार्टी को मुस्लिम समाज तक पहुंच बनाने में मदद कर सकती है। केंद्र और राज्य की राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सबसे युवा कैबिनेट मंत्रियों में शामिल रहे थे। इसके अलावा वे बिहार में उद्योग मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं।

विकास और सॉफ्ट इमेज

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शाहनवाज हुसैन की छवि सौम्य और विकास पर केंद्रित रही है, जो कुछ हद तक नीतीश कुमार की शैली से मेल खाती है। उद्योग मंत्री रहते हुए उन्होंने बिहार में निवेश बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया था।

उनके कार्यकाल में राज्य में इथेनॉल फैक्ट्रियों की योजना और युवा उद्यमी योजना जैसे कदमों की भी काफी चर्चा हुई थी। साथ ही वे कोसी और सीमांचल क्षेत्र से आते हैं, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है, इसलिए वे सामाजिक समीकरणों को साधने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

भाजपा के लिए सियासी गणित

राजनीतिक दृष्टि से भी शाहनवाज हुसैन भाजपा के लिए अहम चेहरा साबित हो सकते हैं। बिहार में मुस्लिम आबादी करीब 17 प्रतिशत मानी जाती है और भाजपा को इस वर्ग से पारंपरिक रूप से कम समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में अगर पार्टी उन्हें बड़ा चेहरा बनाती है तो इससे ‘सबका साथ, सबका विकास’की छवि को भी मजबूती मिल सकती है।

लेकिन कुछ दुविधा भी

हालांकि, उनके नाम को लेकर पार्टी के भीतर कुछ चिंताएं भी बताई जाती हैं। हाल के चुनावों में मिली हार और राजनीतिक समीकरणों को लेकर कुछ नेताओं के बीच मतभेद की चर्चा भी है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि भाजपा को अपने पारंपरिक वोट बैंक के संतुलन को भी ध्यान में रखना होगा।

शाहनवाज हुसैन का राजनीतिक सफर

शाहनवाज हुसैन का जन्म 12 दिसंबर 1968 को बिहार के सुपौल जिले में हुआ था। छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले शाहनवाज 1999 में किशनगंज से पहली बार लोकसभा सांसद बने। उस समय वे देश के सबसे युवा केंद्रीय मंत्रियों में शामिल थे।

वे भागलपुर और अररिया से भी लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में भी उनकी पहचान मजबूत रही है। तेजतर्रार वक्ता और संवाद कुशल नेता के तौर पर उन्हें पार्टी का प्रभावी चेहरा माना जाता है।

फैसला किसके पक्ष में जाएगा?

फिलहाल बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज हैं और भाजपा के भीतर मंथन जारी है। कई नाम सामने आ रहे हैं और राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।

ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि पार्टी आखिर किस चेहरे पर भरोसा करेगी। लेकिन इतना तय है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार की राजनीति में अगला अध्याय किसके नाम से लिखा जाएगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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