भागलपुर एनकाउंटर: कौन था कुख्यात रामधनी यादव, जानिए उसका आपराधिक इतिहास

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: भागलपुर, 29 अप्रैल। सुल्तानगंज में नगर परिषद कार्यालय में हुए सनसनीखेज गोलीकांड के मुख्य आरोपी रामधनी यादव को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। दिनदहाड़े हुई इस वारदात के महज 12 घंटे के भीतर पुलिस की कार्रवाई ने इलाके में सनसनी फैला दी है। हालांकि इस ऑपरेशन में एक डीएसपी समेत दो पुलिस अधिकारी भी घायल हुए हैं।

जानकारी के अनुसार मंगलवार दोपहर रामधनी यादव अपने साथियों के साथ नगर परिषद कार्यालय पहुंचा था। बताया जा रहा है कि उसका निशाना सभापति राजकुमार साह उर्फ गुड्डू थे। इसी दौरान वहां मौजूद कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार ने विरोध किया, जिसके बाद अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं सभापति राजकुमार साह भी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है।

कौन था रामधनी यादव ?

रामधनी यादव क्षेत्र में लंबे समय से दहशत का पर्याय माना जाता था। वह कई आपराधिक मामलों में आरोपी रहा था और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर उसका नाम लगातार चर्चाओं में रहता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी और हिंसक वारदातों से जुड़े कई मामले दर्ज थे।

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रामधनी यादव इलाके में दहशत का दूसरा नाम था। वह सुल्तानगंज नगर परिषद की उपसभापति नीलम देवी का पति था, लेकिन उसकी पहचान उसके जघन्य अपराधों से ज्यादा थी। रामधनी के खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार वह एक व्यक्ति का कटा हुआ सिर हाथ में लेकर सीधे थाने पहुंच गया था। इस घटना के बाद से ही उसका नाम पूरे भागलपुर और आसपास के जिलों में गूंजने लगा था।

घटना के बाद भागलपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर रामधनी की तलाश शुरू की। देर रात पुलिस टीम ने उसे पकड़ लिया और हथियार बरामदगी के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसके साथियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में रामधनी यादव गोली लगने से घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि नगर परिषद के टेंडर और वर्चस्व को लेकर यह पूरा विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि सभापति और रामधनी यादव के बीच लंबे समय से तनातनी थी, जो इस खूनी वारदात में बदल गई।

इस घटना में जान गंवाने वाले कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार को एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी बताया जा रहा है। उन्होंने हमलावरों का विरोध किया और अपनी ड्यूटी निभाते हुए जान गंवा दी।

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