‘शुभेंदु के डर से ममता के पुष्पा सरेंडर’, जहांगीर ने फलता का चुनावी मैदान छोड़ा, UP के ‘सिंघम’ को दी थी चुनौती

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पश्चिम बंगाल की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने मतदान से ठीक पहले चुनावी मैदान से हटने का ऐलान कर दिया है। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आया है, जब चुनाव प्रचार का अंतिम दिन चल रहा था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए टीएमसी नेता जहांगिर खान ने कहा, “मैं फलता का बेटा हूँ और चाहता हूँ कि फलता शांत रहे और तरक्की करे। हमारी मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फलता के विकास के लिए विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसी वजह से मैं इस निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान की प्रक्रिया से खुद को अलग कर रहा हूँ।”

फलता सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और यहां 21 मई को पुनर्मतदान होना है। इस बीच टीएमसी के बड़े नेताओं की प्रचार से दूरी ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए थे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर फलता में प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी नजर क्यों नहीं आ रहे हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने भी जहांगीर खान पर कटाक्ष करते हुए कहा, “पुष्पा कहां है?”

दरअसल, जहांगीर खान पिछले दिनों अपने एक बयान को लेकर काफी चर्चा में रहे थे। चुनावी सभा में उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षक और यूपी के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को चुनौती देते हुए कहा था, “अगर आप सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं… पुष्पराज, झुकेगा नहीं।” अब उनके चुनावी मैदान छोड़ने के फैसले को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है।

फलता सीट लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन इस बार बीजेपी यहां जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 29 अप्रैल को हुए मतदान से हुई थी। उस दिन फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 बूथों पर वोटिंग हुई थी, लेकिन मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे। विपक्ष ने ईवीएम पर ब्लैक टेप लगाने, मतदाताओं को डराने-धमकाने और धांधली करने के गंभीर आरोप लगाए थे।

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने पूरे मतदान को रद्द कर दिया और 21 मई को दोबारा चुनाव कराने का फैसला लिया। आयोग के इस कदम को राज्य की राजनीति में एक बड़े और ऐतिहासिक फैसले के तौर पर देखा जा रहा है।

वहीं, बीजेपी नेता दिलीप घोष ने दावा किया कि टीएमसी को अपनी हार का अंदेशा हो चुका है, इसलिए पार्टी का प्रचार अभियान कमजोर पड़ गया है। उन्होंने कहा कि “अब लोगों को सब समझ आ गया है और इस बार जनता जवाब देने के लिए तैयार है।”

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