बिहार कैबिनेट की बैठक में 27 प्रस्तावों को हरी झंडी,कई बड़े फैसलों पर मुहर

27 प्रस्तावों की मंजूरी से तेज होगा विकास कार्य

Rashmi Tiwari
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में पटना स्थित मुख्य सचिवालय के मंत्रिमंडल कक्ष में बिहार कैबिनेट की अहम बैठक संपन्न हो गई। बैठक में कुल 27 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिनमें कई बड़े प्रशासनिक और नीतिगत फैसले शामिल हैं। बैठक में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार चौधरी और विजेन्द्र यादव समेत सभी कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
जमीन सर्वे और डिजिटल नक्शे के नियमों में बड़ा बदलाव
कैबिनेट बैठक में जमीन सर्वे और डिजिटल नक्शा तैयार करने के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। सरकार ने “बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त नियमावली, 2026” को स्वीकृति दे दी है। अब गांवों के साथ-साथ शहर और नगर क्षेत्रों में भी तेजी से जमीन सर्वे का कार्य किया जाएगा। सरकार का दावा है कि नए नियम लागू होने के बाद जमीन रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होंगे। इससे जमीन विवाद कम करने में मदद मिलेगी और लोगों को जमीन से जुड़े दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
गोपालगंज में बनेगा IB का नया ऑफिस
कैबिनेट ने गोपालगंज में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नए कार्यालय और स्टाफ क्वार्टर निर्माण को भी मंजूरी दी है। इसके लिए बिहार सरकार केंद्र सरकार को 30 डिसमिल सरकारी जमीन उपलब्ध कराएगी। इसके बदले राज्य सरकार को लगभग 67.50 लाख रुपये प्राप्त होंगे। माना जा रहा है कि इससे राज्य की सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
पटना हाई कोर्ट के जजों के लिए खरीदी जाएंगी नई गाड़ियां
बैठक में पटना हाई कोर्ट के जजों के लिए 10 नई गाड़ियों की खरीद को मंजूरी दी गई। इनमें इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन शामिल होंगे। इन गाड़ियों की खरीद के लिए आकस्मिक निधि से करीब 3.70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सरकार अब पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए EV और हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा दे रही है।
शराबबंदी मामलों के लिए खुलेंगे नए कोर्ट
शराबबंदी कानून से जुड़े मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने मधुबनी और दरभंगा के बेनीपुर में नए कोर्ट खोलने का फैसला लिया है। इसके लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के दो नए पदों को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे शराबबंदी से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लंबित मामलों में कमी होगी। सरकार का मानना है कि कैबिनेट के इन फैसलों से प्रशासनिक व्यवस्था और मजबूत होगी। जमीन सर्वे में पारदर्शिता, न्यायिक प्रक्रिया में तेजी और आधुनिक संसाधनों के इस्तेमाल से आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

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