NEWS PR डेस्क: मुजफ्फरपुर, 07 जून। प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है। हादसे के बाद जहां प्रसाद हॉस्पिटल को खाली कराकर उसके एक हिस्से को सील कर दिया गया है, वहीं जिले के कई निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आने के बाद अब तक 12 नर्सिंग होम पर सीलिंग की कार्रवाई की जा चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एसकेएमसीएच के आसपास संचालित कई निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों की विशेष जांच की गई। इस दौरान आवश्यक मानकों और नियमों का पालन नहीं पाए जाने पर दर्जनभर संस्थानों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि प्रसाद हॉस्पिटल से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। अस्पताल प्रबंधन से जल्द पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया जाएगा। वहीं, अस्पताल से संबंधित आवश्यक दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय को भेज दिए गए हैं।

मुख्यालय ने अस्पताल के पंजीकृत बेडों की संख्या, आईसीयू एवं सीसीयू की स्वीकृत क्षमता, घटना के समय भर्ती मरीजों की संख्या तथा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत जारी लाइसेंस से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी थी। विभाग द्वारा इन सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार कर पटना भेज दी गई है।
जांच का दायरा अब अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों तक भी पहुंच गया है। प्रसाद हॉस्पिटल में सेवाएं देने वाले एक सरकारी डॉक्टर की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। इस संबंध में सिविल सर्जन ने एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। संबंधित चिकित्सक से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए वह निजी अस्पताल में किस आधार पर कार्य कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में एसकेएमसीएच के कई डॉक्टर भी सेवाएं दे रहे थे, जिनमें कुछ वरिष्ठ और विभागाध्यक्ष स्तर के चिकित्सक भी शामिल बताए जा रहे हैं। विभाग इन सभी तथ्यों की जांच कर रहा है।
इधर, अग्निकांड के बाद प्रसाद हॉस्पिटल से संबद्ध नर्सिंग कॉलेज भी जांच के दायरे में आ गया है। स्वास्थ्य विभाग कॉलेज के लाइसेंस, मान्यता, सीट स्वीकृति, छात्र नामांकन और नवीनीकरण से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा कर रहा है। शिकायत मिली है कि कई बार स्वीकृत क्षमता से अधिक छात्रों का नामांकन किया गया। इसके अलावा अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था और भवन मानकों की भी जांच की जाएगी।
अग्निकांड की वजहों का पता लगाने के लिए घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद अस्पताल कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। कर्मचारियों ने जांच अधिकारियों को बताया कि हादसे वाले दिन अचानक तेज आवाज सुनाई दी, जिसके बाद आईसीयू क्षेत्र में धुआं फैलने लगा। कुछ ही मिनटों में पूरे अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और मरीजों, परिजनों तथा कर्मचारियों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
कर्मचारियों के अनुसार, सबसे पहले एक बेड मॉनिटर से असामान्य आवाज आई थी और वहीं से धुआं निकलना शुरू हुआ। धीरे-धीरे धुआं पूरे आईसीयू में फैल गया, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने सभी कर्मचारियों के अलग-अलग बयान दर्ज किए हैं, जिनके आधार पर विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन मानकों को लेकर भी व्यापक समीक्षा शुरू कर दी गई है।