NEWS PR डेस्क: पटना, 26 जून। पटना हाईकोर्ट ने चर्चित रिषु श्री मामले में मीडिया ट्रायल पर सख्त रुख अपनाते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया मंचों को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक याचिकाकर्ता को किसी भी रूप में दोषी या अपराध का जिम्मेदार बताकर प्रस्तुत न किया जाए।
न्यायमूर्ति अंसुल की एकलपीठ ने कहा कि मीडिया को जांच और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की रिपोर्टिंग करने की स्वतंत्रता है, लेकिन ऐसी रिपोर्टिंग से बचना होगा जिससे अभियुक्त के दोषी होने का पूर्वाग्रह उत्पन्न हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुकदमे के अंतिम निष्कर्ष से पहले किसी व्यक्ति को ‘मास्टरमाइंड’, ‘किंगपिन’, ‘स्कैमस्टर’ या इसी तरह के विशेषणों से संबोधित करना न्यायसंगत नहीं है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रत्येक अभियुक्त को निष्पक्ष सुनवाई का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है और मीडिया की प्रस्तुति इस अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकती। अदालत ने यह भी माना कि गैर-जिम्मेदाराना और अटकलों पर आधारित रिपोर्टिंग न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के साथ-साथ निष्पक्ष सुनवाई में बाधा उत्पन्न कर सकती है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मीडिया ट्रायल और पूर्व-निषेधात्मक आदेशों से जुड़े उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ मीडिया की जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम प्रतिबंध केवल समाचार पत्रों और टीवी चैनलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल, पॉडकास्ट, वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया चैनलों पर भी समान रूप से लागू होगा। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
