बिहार की श्रेया कौशिक को मिली 3 करोड़ की लिंकन स्कॉलरशिप, पूरे भारत से इकलौती छात्रा का चयन

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना/सीवान, 17 जुलाई। बिहार की बेटी श्रेया कौशिक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सीवान की रहने वाली 18 वर्षीय श्रेया का चयन अमेरिका की प्रतिष्ठित लिंकन स्कॉलरशिप के लिए हुआ है। करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य की इस स्कॉलरशिप के लिए इस वर्ष पूरे भारत से केवल श्रेया का चयन हुआ है, जबकि दुनिया भर से महज 10 छात्रों को ही यह सम्मान मिलता है।

इस स्कॉलरशिप के तहत श्रेया अमेरिका के केंटकी स्थित सेंटर कॉलेज में चार वर्षीय स्नातक (बैचलर) की पढ़ाई करेंगी। लिंकन स्कॉलरशिप को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित स्नातक छात्रवृत्तियों में माना जाता है। इसकी शुरुआत अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की स्मृति में की गई थी।

यह छात्रवृत्ति केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत ट्यूशन फीस, छात्रावास, भोजन, किताबें, अध्ययन सामग्री, स्वास्थ्य बीमा, हवाई यात्रा और अन्य आवश्यक व्यक्तिगत खर्चों का पूरा वहन किया जाता है। चयन प्रक्रिया में केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, सामाजिक सरोकार और बदलाव लाने की सोच को भी प्रमुख आधार बनाया जाता है।

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श्रेया का जन्म बिहार के सीवान जिले में हुआ था। बाद में उनकी शिक्षा के लिए परिवार दिल्ली चला गया, जहां उन्होंने नई दिल्ली के आया नगर स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय से स्कूली पढ़ाई पूरी की। कम उम्र से ही उन्होंने नेतृत्व और सामाजिक कार्यों में रुचि दिखाई। महज 13 वर्ष की उम्र में वह डेक्सटैरिटी ग्लोबल से जुड़ गईं, जो विभिन्न पृष्ठभूमि के छात्रों को नेतृत्व कौशल विकसित करने और वैश्विक अवसरों तक पहुंचने में मदद करने वाली संस्था है।

संस्था से जुड़ने के बाद श्रेया ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं और नेतृत्व कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इन्हीं अनुभवों, मजबूत शैक्षणिक रिकॉर्ड और नेतृत्व क्षमता के आधार पर उनका चयन इस प्रतिष्ठित वैश्विक छात्रवृत्ति के लिए हुआ।

अपनी सफलता पर श्रेया ने कहा कि अब्राहम लिंकन के नाम पर मिलने वाली यह छात्रवृत्ति उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण को देते हुए कहा कि उचित मेंटरशिप ने उन्हें अपनी परिस्थितियों से आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में वह अपनी शिक्षा और अनुभव का उपयोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करना चाहती हैं।

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