NEWS PR डेस्क: पटना, 24 जुलाई। बिहार में भाजपा नेतृत्व वाली सम्राट सरकार ने शुक्रवार को अपने कार्यकाल के 100 दिन पूरे कर लिए हैं । इस दौरान सरकार ने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार, सामाजिक सुरक्षा और विकास योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। सरकार ने अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के साथ कई प्रशासनिक बदलाव भी किए हैं।
पिछले 100 दिनों में सरकार ने सुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से 13 विधेयक पारित किए। वहीं मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर ‘लोक सेवक आवास’ रखा गया। कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पुलिस ने 16 कुख्यात अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर कार्रवाई की, जिसमें चार अपराधी मारे गए, जबकि 12 अपराधियों के पैर में गोली लगने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 132 वर्ष पुराने जेल मैनुअल को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। बड़े टेंडर घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारियों समेत कई अधिकारियों की गिरफ्तारी भी इस अवधि की प्रमुख कार्रवाई रही।
परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने पेपर लीक माफिया के खिलाफ सख्त प्रावधान किए हैं। इसके तहत ऐसे मामलों में सीसीए के तहत कार्रवाई और आरोपितों को डेढ़ वर्ष तक जमानत नहीं मिलने का प्रावधान किया गया है। वहीं छात्राओं की सुरक्षा के लिए ‘पुलिस दीदी’ पहल शुरू की गई है। डायल-112 की प्रतिक्रिया समय को 7 से 8 मिनट तक लाने का लक्ष्य भी तय किया गया है।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत सरकार ने ‘पेंशन दिवस’ की शुरुआत की है। इसके तहत प्रत्येक महीने की 10 तारीख को लाभार्थियों के खातों में पेंशन की राशि भेजी जा रही है। वर्तमान में करीब 97.84 लाख लोगों को इसका लाभ मिल रहा है, जबकि शेष पात्र लाभार्थियों को भी जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
शहरी विकास के क्षेत्र में 12 नई सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया गया है। योजना का प्रारूप तैयार कर कंसल्टेंट नियुक्त किए जा चुके हैं, हालांकि कुछ क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध भी सामने आया है।

जन शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए ‘सहयोग’ कार्यक्रम लागू किया गया है। इसके तहत 30 दिनों के भीतर शिकायत का निस्तारण अनिवार्य किया गया है। निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में 551 मॉडल स्कूल और 211 नए डिग्री कॉलेज शुरू किए गए हैं। हालांकि इन संस्थानों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब भी चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में सरकार ने 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना और एक करोड़ रोजगार सृजन जैसे लक्ष्यों पर काम शुरू किया है।
