पैक्स चुनाव में बड़ा बदलाव: वोटर बनाने की प्रक्रिया से उम्मीदवारों की भूमिका खत्म, सहकारिता विभाग के नए नियम लागू

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना/बिहार, 23 मार्च। बिहार में पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) चुनाव को अधिक पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए सहकारिता विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब पैक्स में सदस्यता की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी, जिससे चुनावी प्रक्रिया में मनमानी और गड़बड़ी की आशंकाओं पर लगाम लगने की उम्मीद है।

दरअसल, पहले पैक्स चुनाव में सबसे बड़ा विवाद वोटर बनाने को लेकर होता था। पैक्स अध्यक्ष या संभावित उम्मीदवारों के पास ही सदस्य (वोटर) बनाने की जिम्मेदारी रहती थी, जिस पर अक्सर पक्षपात और हेरफेर के आरोप लगते थे। कई बार यह आरोप भी सामने आते थे कि अपने समर्थकों को ही जोड़कर चुनाव को प्रभावित किया जाता है।

अब इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया गया है। नए प्रावधान के अनुसार, कोई भी पात्र व्यक्ति ऑनलाइन आवेदन कर पैक्स का सदस्य बन सकता है। आवेदन की जांच के बाद यदि वह निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है, तो उसे सदस्यता दे दी जाएगी। इससे सदस्यता प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होने की बात कही जा रही है।

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एक और अहम बदलाव यह है कि अब पैक्स में सदस्यों की संख्या सीमित नहीं रहेगी। यानी जो भी व्यक्ति तय मानदंड पूरा करेगा, वह सदस्य बन सकेगा। इससे चुनाव में भागीदारी बढ़ेगी और प्रतिनिधित्व ज्यादा व्यापक होगा।

पैक्स का संचालन अब 13 सदस्यीय प्रबंधन समिति करेगी, जिसका चुनाव हर पांच साल में होगा। इस समिति में सामाजिक संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है। कुल सीटों में 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जबकि दो सीटें अतिपिछड़ा वर्ग और दो अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित की गई हैं।

जहां तक पैक्स अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया की बात है, तो इसके लिए पहले निर्वाचन विभाग द्वारा वोटर लिस्ट जारी की जाएगी। इस सूची पर दावा-आपत्ति के लिए समय दिया जाएगा, ताकि किसी तरह की त्रुटि को सुधारा जा सके। इसके बाद उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे और केवल पैक्स सदस्य ही मतदान करेंगे। अंततः जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही पैक्स अध्यक्ष चुना जाएगा।

राज्य में कुछ जगहों पर पहले ही पैक्स चुनाव संपन्न हो चुके हैं, जबकि कई जिलों में चुनाव प्रक्रिया जारी है या प्रस्तावित है। ऐसे में यह नया नियम आगामी चुनावों को अधिक निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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