NEWS PR डेस्क: कैमूर: भभुआ स्थित लिच्छवी भवन परिसर में सोमवार को अल्पसंख्यक अधिकार मंच के बैनर तले 12 सूत्री मांगों को लेकर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। संगठन ने यह कार्यक्रम राज्यव्यापी आह्वान के तहत किया। धरने में मंच से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व और सामाजिक सुरक्षा समेत विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों पर नाराजगी जताई।
महबूब अंसारी ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संगठन के जिला मंत्री कॉमरेड महबूब अंसारी ने केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू-मुस्लिम मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना था कि देश के सभी समुदायों को समान अधिकार और अवसर मिलना चाहिए और धार्मिक या सामाजिक आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर भी चिंता जताई। महबूब अंसारी ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान एसआईआर के माध्यम से मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटे जाने की आशंका है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना सरकार और चुनाव व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
उत्तर प्रदेश सरकार पर भी साधा निशाना
महबूब अंसारी ने उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की ओर से मुसलमानों के खिलाफ लगातार आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के समाज में नफरत या दंगा भड़काने वाली बात कहने पर कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

आपदा किसी जाति या धर्म को देखकर नहीं आती
धरने को बिहार पर्वतीय खेतिहर एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड रंग लाल पासवान ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा किसी जाति या धर्म को देखकर नहीं आती। बाढ़, सूखा, भूकंप और अन्य आपदाओं का प्रभाव सभी समुदायों पर पड़ता है। ऐसे में शासन और समाज में जाति तथा धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने सामाजिक समानता और सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा की मांग की।
किसान आंदोलनों का भी किया जिक्र
बिहार राज्य किसान सभा के जिला मंत्री ने किसान आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन में हिंदू-मुस्लिम एकता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने दावा किया कि किसानों के लंबे आंदोलन के दबाव में केंद्र सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार को किसान, मजदूर और आम जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उर्दू शिक्षकों की बहाली और सेना भर्ती में अवसर की मांग
धरना-प्रदर्शन के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। मंच की ओर से विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों की बहाली करने और सेना भर्ती में अल्पसंख्यक युवाओं को अवसर एवं प्राथमिकता देने समेत कुल 12 सूत्री मांगें सरकार के सामने रखी गईं।
जिलाधिकारी को सौंपा 12 सूत्री मांगों का आवेदन
कार्यक्रम के अंत में अल्पसंख्यक अधिकार मंच की ओर से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कैमूर जिलाधिकारी को आवेदन सौंपकर मंच की 12 सूत्री मांगों से अवगत कराया और उन पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
धरना दे रहे लोगों ने कहा कि उनकी मांगें केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुसार शिक्षा, रोजगार, समान अवसर, सामाजिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकार सभी नागरिकों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील की।
कैमूर से रिपोर्टर: ब्रजेश दुबे