NEWS PR डेस्क: बिहार में बाढ़ के कारण प्रभावित हुई खेती को लेकर राज्य सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। कृषि विभाग अब प्रभावित इलाकों में जाकर यह पता लगाएगा कि किसानों की फसलों को वास्तविक रूप से कितना नुकसान पहुंचा है। नुकसान के आकलन के बाद प्रभावित किसानों को सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ की स्थिति और खेती पर पड़े असर की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कागजी रिपोर्ट के बजाय जमीनी स्थिति के आधार पर फसल नुकसान का आंकड़ा तैयार किया जाए, ताकि सहायता सही किसानों तक पहुंच सके।
अधिकारियों को गांव-गांव जाकर स्थिति देखने के निर्देश
बैठक में सभी संबंधित जिलों के कृषि अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने को कहा गया है। अधिकारियों को खेतों में पहुंचकर फसलों की स्थिति देखने, नुकसान का विवरण जुटाने और रिपोर्ट जल्द विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया है। सरकार का जोर इस बात पर है कि बाढ़ से प्रभावित किसानों की वास्तविक परेशानी सामने आए और राहत वितरण में किसी तरह की गड़बड़ी या देरी न हो।
नुकसान के आधार पर मिलेगी आर्थिक मदद
कृषि विभाग द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन किसानों की फसल प्रभावित हुई है और नुकसान की स्थिति क्या है। इसी जानकारी के आधार पर फसल क्षतिपूर्ति समेत दूसरी जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार ने संकेत दिया है कि मौजूदा संकट के दौरान किसानों को राहत देने के साथ-साथ उनकी खेती को दोबारा सामान्य स्थिति में लाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
खराब हुई फसल के बाद अगली खेती पर फोकस
बाढ़ के कारण जिन इलाकों में फसल पूरी तरह या कुछ हिस्से में नष्ट हुई है, वहां किसानों को अगली फसल के लिए वैकल्पिक विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि विभाग इस दिशा में अलग कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
किस क्षेत्र में कौन-सी फसल बेहतर रहेगी, इसका फैसला स्थानीय मिट्टी, मौसम और खेती की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। किसानों को उपयुक्त फसल चुनने के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की भी तैयारी है।
राहत के साथ किसानों को खेती की नई राह
विभाग की योजना सिर्फ तत्काल नुकसान की भरपाई तक सीमित नहीं है। बाढ़ के बाद खेतों की स्थिति को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों की जानकारी देने पर भी जोर है, जिन्हें उपलब्ध परिस्थितियों में लगाया जा सके। इससे प्रभावित किसानों को अगले कृषि चक्र में लौटने में मदद मिल सकती है। कृषि मंत्री ने विभाग को किसानों के हित में सभी जरूरी कदम उठाने और सहायता व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।