NEWS PR डेस्क: सुपौल जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आई है। प्रतापगंज प्रखंड के सूर्यापुर स्थित प्राथमिक विद्यालय मोमनाही में स्थापना के करीब छह दशक बाद भी स्कूल को अपना भवन नसीब नहीं हुआ है। स्कूल का संचालन आज भी टिन, बांस और टाट से बनी फूस की झोपड़ी में किया जा रहा है। इससे 210 नामांकित बच्चों को मजबूरी में इसी अस्थायी ढांचे में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
1965 में हुई थी स्कूल की स्थापना, आज भी नहीं बना भवन
प्राथमिक विद्यालय मोमनाही की स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी। वर्तमान में यहां 210 बच्चे नामांकित हैं और चार शिक्षक-शिक्षिकाएं पदस्थापित हैं। स्कूल का अपना भवन नहीं होने के कारण एक ही झोपड़ीनुमा कमरे में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों का पठन-पाठन कराया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, भवन के अभाव में स्थानीय लोगों के सहयोग से टिन, बांस और टाट की मदद से झोपड़ीनुमा शेड तैयार कराया गया था। इसी अस्थायी शेड में वर्षों से स्कूल चल रहा है वहीं, स्कूल के किचेन शेड का इस्तेमाल फिलहाल कार्यालय के काम के लिए किया जा रहा है।
बारिश में स्कूल परिसर में भर जाता है पानी
स्कूल के HM और शिक्षकों का कहना है कि भवन नहीं होने के कारण बच्चों को काफी परेशानी होती है। बारिश के दिनों में आसपास का पानी स्कूल परिसर में जमा हो जाता है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।

शिक्षकों के मुताबिक, स्कूल भवन निर्माण के लिए कई बार विभाग के उच्च अधिकारियों को सूचना दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक भवन निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हो सकी है।
अधिकारी बोले- जल्द होगी पहल
इस मामले में प्रतापगंज के प्रभारी BEO सीतेश कुमार झा ने बताया कि विद्यालय भवन की आवश्यकता को लेकर विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस दिशा में पहल की जाएगी।
ग्रामीणों और शिक्षकों की मांग है कि छह दशक पुराने इस विद्यालय को जल्द से जल्द स्थायी भवन उपलब्ध कराया जाए, ताकि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित माहौल में पढ़ाई का अवसर मिल सके। इस संबंध में शिक्षा पदाधिकारी सुपौल संग्राम सिंह और शिक्षक माधवेंद्र कुमार का भी बयान है।
सुपौल से रिपोर्टर: अल्ताफ़ राजा