NEWS PR डेस्क: बिहार में बाढ़ ने लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। कई इलाकों में स्कूल, घर और कोचिंग सेंटर पानी में डूब गए हैं। रास्ते भी पूरी तरह बंद हो चुके हैं। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बीच कटिहार के अमदाबाद में बच्चों की पढ़ाई जारी है। यहां एक शिक्षक ने नाव को ही पाठशाला बना दिया है। चारों तरफ बाढ़ का पानी है, लेकिन बच्चों के हाथों में अब भी किताबें और कॉपियां हैं।
रघुनाथपुर में बाढ़ के बीच चल रही नाव वाली पाठशाला
अमदाबाद प्रखंड के रघुनाथपुर इलाके में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सरकारी विद्यालय पानी में डूब चुके हैं और कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई बंद है। कई परिवारों के घर भी जलमग्न हो गए हैं। सड़क किनारे पॉलिथीन के नीचे लोग किसी तरह अपना जीवन गुजार रहे हैं। ऐसे हालात में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित न हो, इसके लिए शिक्षक मोहम्मद साहब ने अनोखी पहल की है।

उन्होंने नाव को ही चलती-फिरती पाठशाला का रूप दे दिया है। रोजाना नाव के जरिए बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित और कम पानी वाले स्थानों तक लाया जाता है। नाव पर ही बच्चे बैठते हैं और शिक्षक उन्हें पढ़ाते हैं।
न घंटी, न चारदीवारी, फिर भी जारी है पढ़ाई
इस नाव वाली पाठशाला में न स्कूल की घंटी बजती है, न चारदीवारी है और न ही कोई बड़ा क्लासरूम। इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई पूरी गंभीरता से चल रही है। शिक्षक मोहम्मद साहब बाढ़ प्रभावित इलाकों से छात्र-छात्राओं को नाव के जरिए निकालकर सुरक्षित स्थान तक लाते हैं। इसके बाद नाव पर ही पढ़ाई शुरू होती है।
बाढ़ के पानी के बीच सत्यम, अन्नु, रोहन और रेहान जैसे बच्चे किताबें खोलकर पढ़ते नजर आते हैं। उनके सामने कई परेशानियां हैं, लेकिन पढ़ने का उत्साह कम नहीं हुआ है।
मुश्किल हालात में भी बच्चों ने नहीं छोड़ी पढ़ाई
बाढ़ ने कई परिवारों से उनका घर, स्कूल और रोजी-रोटी का साधन छीन लिया है। कई जगहों पर लोगों के लिए चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद बच्चों के हाथों में किताबें होना उम्मीद की बड़ी तस्वीर पेश करता है।
शिक्षक मोहम्मद साहब की यह पहल बताती है कि संसाधनों की कमी के बावजूद पढ़ाई का रास्ता निकाला जा सकता है। नाव पर चल रही यह पाठशाला बच्चों के सपनों को जिंदा रखने की कोशिश है।
कटिहार की बाढ़ ने भले ही जनजीवन को प्रभावित किया हो, लेकिन नाव वाली पाठशाला ने यह संदेश दिया है कि पढ़ने की इच्छा और पढ़ाने का जुनून हो तो पानी के बीच भी शिक्षा की लौ जलती रह सकती है।
कटिहार से रिपोर्टर: रतन कुमार